दिल्ली दंगे 2020: उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

दिल्ली के 2020 सांप्रदायिक दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में सुप्रीम कोर्ट आज (5 जनवरी) उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ इस फैसले पर फैसला देगी।

Jan 4, 2026 - 13:09
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दिल्ली दंगे 2020: उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026। दिल्ली के 2020 सांप्रदायिक दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में सुप्रीम कोर्ट आज उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पांच आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा। यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ द्वारा सुनाया जाएगा।

इस मामले में कुल सात आरोपी हैं – उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान, मुहम्मद शकील खान और शादाब अहमद। इन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दिल्ली पुलिस का आरोप है कि आरोपी फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश के मास्टरमाइंड थे। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा CAA और NRC के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलीलें पेश कीं। आरोपियों के पक्ष में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंहवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा ने बहस की।

हाल ही में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा उमर खालिद को लिखे गए पत्र ने विवाद खड़ा कर दिया। बीजेपी ने ममदानी पर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। यह पत्र उमर खालिद की साथी बानो ज्योत्सना लाहिरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया था।

उल्लेखनीय है कि आरोपी 2 सितंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किए थे। आज का निर्णय तय करेगा कि क्या ये आरोपियों को जमानत मिलेगी या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल मामले की दिशा तय करेगा, बल्कि देश की न्यायिक प्रक्रिया और UAPA मामलों में जमानत की संवैधानिक सीमा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।