IRCTC घोटाला: लालू प्रसाद यादव दिल्ली HC पहुंचे, ट्रायल कोर्ट के आरोपों को दी चुनौती
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कथित IRCTC घोटाले में ट्रायल कोर्ट द्वारा तय आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई 5 जनवरी को करेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कथित IRCTC घोटाले में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा तय आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में 5 जनवरी को होगी।
इस घोटाले में लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके पुत्र और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य पर भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को आरोप तय करते हुए कहा था कि जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, उन्होंने अपने पद का कथित गलत इस्तेमाल किया।
कोर्ट ने यह भी माना कि IRCTC के होटल टेंडर से जुड़ी पात्रता शर्तों में हेरफेर किया गया ताकि कुछ पसंदीदा कंपनियों को लाभ मिल सके। ट्रायल कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि लालू यादव को इस कथित साजिश की जानकारी थी और वे फैसले प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे। कोर्ट के अनुसार इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
CBI ने आरोप लगाया है कि लालू यादव और उनके परिवार ने रेलवे के प्रमुख रहने के दौरान एक निजी फर्म को ठेके देने के लिए रिश्वत के रूप में भूमि और शेयर प्राप्त किए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कई लोग शामिल थे और यह पूरी गतिविधि निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के बहाने क्रोनी कैपिटलिज्म जैसी प्रतीत होती है।
अब लालू यादव ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है और दिल्ली हाईकोर्ट में जमानत या आरोपों की समीक्षा की मांग की है। इस सुनवाई पर देश की निगाहें लगी हुई हैं, क्योंकि यह मामला भ्रष्टाचार और उच्च स्तर के राजनीतिक हस्तक्षेप के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।
सुनवाई के बाद अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरोपियों को जमानत मिलती है या ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा जाता है। इस मामले की कानूनी जटिलता और राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इसे मीडिया और जनता दोनों द्वारा बड़े ध्यान से देखा जा रहा है।