ओरमा पंचायत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर जागरूकता बैठक, ग्रामीणों ने लिया प्लास्टिक मुक्त गांव का संकल्प

बालोद जिले के ओरमा पंचायत में सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता बैठक आयोजित की गई। ग्रामीणों ने प्लास्टिक का उपयोग न करने और स्वच्छ, स्वस्थ गांव बनाने का संकल्प लिया।

Apr 16, 2026 - 17:19
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ओरमा पंचायत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर जागरूकता बैठक, ग्रामीणों ने लिया प्लास्टिक मुक्त गांव का संकल्प

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम पंचायत ओरमा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने और इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक पंचायत भवन में आयोजित हुई, जिसमें सरपंच, पंचगण, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सदस्य तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों और पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि प्लास्टिक न केवल मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित करता है, बल्कि यह पशु-पक्षियों और मानव स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत हानिकारक है। प्लास्टिक के कचरे के कारण भूमि की उर्वरता कम होती है और जल निकासी व्यवस्था भी प्रभावित होती है, जिससे कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

ग्राम पंचायत के सरपंच ने बैठक में उपस्थित ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने दैनिक जीवन में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें और इसके स्थान पर कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग अपनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हर व्यक्ति छोटे-छोटे प्रयास करे, तो गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाना संभव है।

बैठक में NRLM के सदस्यों ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए ग्रामीणों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प अपनाना न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है, जैसे कि कपड़े के थैले बनाना।

इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि गांव में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत घर-घर जाकर लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाएगा और उन्हें इसके उपयोग से बचने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही, पंचायत स्तर पर भी इस दिशा में सख्त कदम उठाने की योजना बनाई गई है।

बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे और अपने गांव को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाए रखने में सक्रिय योगदान देंगे।

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि यह ग्रामीणों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करती है। यदि इसी प्रकार की पहल अन्य गांवों में भी अपनाई जाए, तो निश्चित ही प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और एक स्वच्छ, सुंदर तथा स्वस्थ वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।