UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले में प्रशासन की सजगता और त्वरित कार्रवाई के चलते एक बाल विवाह को समय रहते रोक दिया गया। यह कार्रवाई कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन में की गई, जिससे एक सामाजिक कुप्रथा पर प्रभावी नियंत्रण का संदेश गया है।
जानकारी के अनुसार, डौण्डी विकासखंड के ग्राम भर्रीटोला निवासी एक युवक का विवाह राजनांदगांव जिले के ग्राम साल्हेटोला की युवती के साथ 21 अप्रैल को संपन्न हुआ था। इस विवाह की सूचना मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संयुक्त टीम को मौके पर भेजा। टीम में राजस्व, महिला एवं बाल विकास, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल थे।
जांच के दौरान यह पाया गया कि वर की आयु 21 वर्ष से कम है, जो कि बाल विवाह प्रतिषेध कानून के तहत अवैध है। इस आधार पर विवाह को वैध नहीं माना गया और उसे शून्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। चूंकि विवाह राजनांदगांव जिले में संपन्न हुआ था, इसलिए वहां के संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी समीर पाण्डेय ने बताया कि प्रशासन ने न केवल विवाह को रोका, बल्कि वर-वधु और उनके परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें समझाया गया कि बाल विवाह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
प्रशासनिक टीम ने वधु को सुरक्षित रूप से उसके गृह ग्राम साल्हेटोला (राजनांदगांव) पहुंचाया। साथ ही, ग्राम पंचायत के सरपंच और ग्रामीणों की उपस्थिति में वर के पिता से भविष्य में बाल विवाह न करने का लिखित घोषणा पत्र भी लिया गया।
इस कार्रवाई के दौरान तहसीलदार देवेन्द्र नेताम, एसडीएम सुरेश साहू, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।
प्रशासन ने इस मामले में उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की है, जिन्होंने बाल विवाह को संपन्न कराने में सहयोग किया था। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत दल्लीराजहरा थाना में एफआईआर दर्ज की गई है।
यह कार्रवाई समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह जैसी घटना की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
कुल मिलाकर, बालोद प्रशासन की यह पहल न केवल एक बाल विवाह को रोकने में सफल रही, बल्कि समाज में कानून के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का संदेश भी देने में कारगर साबित हुई है।