एनएमडीसी में हायर गाड़ी मालिकों की बढ़ी मुश्किलें, खर्च ज्यादा आय कम और भुगतान में देरी से आर्थिक संकट
दंतेवाड़ा जिले के बचेली–बैलाडीला क्षेत्र में एनएमडीसी के लिए हायर की गई गाड़ियों के मालिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। गाड़ी मालिकों का कहना है कि 60 हजार रुपये मासिक भुगतान में ड्राइवर वेतन और बैंक किस्त भी पूरी नहीं हो पा रही है, वहीं भुगतान में देरी और 3–4 साल में गाड़ी हटाने के नियम से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी,बचेली | दंतेवाड़ा जिले के बचेली–बैलाडीला क्षेत्र में एनएमडीसी लिमिटेड के लिए हायर की गई गाड़ियों के मालिक इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। स्थानीय गाड़ी मालिकों का कहना है कि कंपनी द्वारा तय की गई भुगतान राशि, सख्त नियम और भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण उनकी स्थिति दिन-ब-दिन दयनीय होती जा रही है।
जानकारी के अनुसार एनएमडीसी द्वारा 24 घंटे संचालन के लिए हायर की गई गाड़ियों के लिए लगभग 60 हजार रुपये मासिक भुगतान निर्धारित किया गया है। गाड़ी मालिकों का कहना है कि इस राशि में उन्हें ड्राइवर का वेतन, गाड़ी का मेंटेनेंस, टायर, इंजन ऑयल, सर्विस और अन्य खर्च खुद उठाने पड़ते हैं। बैलाडीला क्षेत्र में ड्राइवरों का औसत वेतन लगभग 15 हजार रुपये है, जबकि 24 घंटे गाड़ी संचालन के लिए दो ड्राइवर रखना अनिवार्य हो जाता है। इस प्रकार केवल ड्राइवरों के वेतन पर ही लगभग 30 हजार रुपये का खर्च आ जाता है।
इसके अलावा अधिकांश गाड़ी मालिक अपनी गाड़ियां बैंक या फाइनेंस कंपनियों से ऋण लेकर खरीदते हैं। एक गाड़ी की कीमत लगभग 15 से 17 लाख रुपये तक होती है और इसकी मासिक किस्त करीब 30 से 35 हजार रुपये तक पड़ती है। ऐसी स्थिति में ड्राइवरों का वेतन और बैंक की किस्त चुकाने के बाद गाड़ी मालिकों के पास लगभग कोई आय नहीं बचती। यदि गाड़ी में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी आ जाए या टायर, सर्विसिंग अथवा अन्य मरम्मत की आवश्यकता पड़े, तो उसका खर्च गाड़ी मालिकों को अपनी जेब से उठाना पड़ता है।
गाड़ी मालिकों का कहना है कि भुगतान में हो रही देरी उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही है। उनका कहना है कि पूरे महीने गाड़ी चलाने के बाद भी उन्हें बिल का भुगतान अक्सर 15 या 16 तारीख के बाद मिलता है। जबकि बैंक और फाइनेंस कंपनियों की किस्त अधिकतर 4 या 5 तारीख तक जमा करनी होती है। भुगतान में लगातार देरी के कारण कई गाड़ी मालिकों की क्रेडिट हिस्ट्री भी खराब हो रही है, जिससे उन्हें भविष्य में आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
इसके अलावा गाड़ी मालिकों ने एनएमडीसी के उस नियम पर भी सवाल उठाए हैं, जिसके तहत केवल 3 से 4 साल पुरानी गाड़ियों को ही हायर किया जाता है और इसके बाद उन्हें काम से हटा दिया जाता है। गाड़ी मालिकों का कहना है कि सरकारी नियमों के अनुसार एक वाहन की आयु लगभग 10 वर्ष होती है और आरटीओ द्वारा उसकी स्थिति के आधार पर इसे 5 वर्ष तक और बढ़ाया जा सकता है। इसके बावजूद एनएमडीसी द्वारा 3–4 वर्ष बाद गाड़ी हटाने का नियम उनके लिए समझ से परे है।
गाड़ी मालिकों का कहना है कि एक गाड़ी खरीदने के लिए उन्हें 3 से 4 लाख रुपये तक डाउन पेमेंट देना पड़ता है। कई वर्षों तक किस्त भरने के बाद जब गाड़ी की फाइनेंस अवधि समाप्त होने के करीब होती है, उसी समय एनएमडीसी द्वारा गाड़ी को काम से हटा दिया जाता है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
स्थानीय गाड़ी मालिकों ने एनएमडीसी प्रबंधन से मांग की है कि इस व्यवस्था की समीक्षा की जाए, हायर अवधि बढ़ाई जाए, भुगतान दरों में सुधार किया जाए और बिलों का भुगतान समय पर किया जाए। उनका कहना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो स्थानीय गाड़ी मालिकों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।