निमोनिया की रोकथाम रोज़मर्रा की आदतों से संभव: डॉ. दिपेश मस्के ने बताया बचाव का सूत्र

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल निमोनिया से 25 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। विशेषज्ञ डॉ. दिपेश मस्के का कहना है कि टीकाकरण, स्वच्छता, संतुलित जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सहायता के माध्यम से इस रोग की रोकथाम संभव है। उन्होंने कहा कि रोज़मर्रा की अच्छी आदतें ही निमोनिया के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं।

Nov 11, 2025 - 17:48
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निमोनिया की रोकथाम रोज़मर्रा की आदतों से संभव: डॉ. दिपेश मस्के ने बताया बचाव का सूत्र

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार हर वर्ष विश्वभर में 25 लाख से अधिक लोग निमोनिया की चपेट में आकर अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें 5 वर्ष से कम आयु के 6 लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण समय पर रोकथाम और सावधानी बरतने से काफी हद तक टाला जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. दिपेश मस्के के अनुसार, “निमोनिया फेफड़ों का ऐसा संक्रमण है जिसमें वायुकोष (एल्वियोली) द्रव या मवाद से भर जाते हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।” यह बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के संक्रमण से हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों को इसका खतरा सबसे अधिक रहता है।

भारत में मौसम परिवर्तन, वायु प्रदूषण और कम टीकाकरण दर के कारण हर वर्ष ठंड के मौसम में निमोनिया के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। ऐसे में जनजागरूकता और बचाव के उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है।

डॉ. मस्के के अनुसार, “साफ-सफाई और श्वसन स्वच्छता ही इस रोग से बचाव की पहली पंक्ति है।” खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना, नियमित हाथ धोना, पर्याप्त वेंटिलेशन और संक्रमणग्रस्त व्यक्तियों से दूरी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि न्यूमोकोकल और इन्फ्लूएंजा टीकाकरण निमोनिया की रोकथाम में बेहद प्रभावी है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा, मधुमेह जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को यह टीके जरूर लगवाने चाहिए।

संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नींद से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। फलों, सब्जियों और प्रोटीन युक्त आहार के साथ विटामिन सी, डी और जिंक का सेवन श्वसन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

डॉ. मस्के ने चेताया कि लगातार खांसी, बुखार, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें। समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

उन्होंने कहा, “निमोनिया की रोकथाम किसी विशेष दवा या असाधारण उपाय पर नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की स्वच्छ और स्वस्थ आदतों पर निर्भर करती है।”

यही छोटी-छोटी आदतें समाज को एक बड़ी बीमारी से सुरक्षित रखने की सबसे मजबूत ढाल बन सकती हैं