दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के विद्यार्थियों ने किया इसरो श्रीहरिकोटा एवं विशाखापट्टनम का शैक्षणिक भ्रमण — विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान की जमीनी समझ विकसित
दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के 50 विद्यार्थियों और 5 शिक्षकों का दल इसरो श्रीहरिकोटा एवं विशाखापट्टनम के शैक्षणिक भ्रमण पर गया, जहां उन्होंने रॉकेट लॉन्च पैड, मिशन कंट्रोल सेंटर और सैटेलाइट निर्माण केंद्र का अवलोकन किया। इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक शुभांशु शुक्ला से मुलाकात कर विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष अभियानों की गहराई से जानकारी प्राप्त की।
UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, बचेली/दंतेवाड़ा। जिले के विद्यार्थियों को विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान की गहराई से परिचित कराने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा एवं बीजापुर जिले के कुल 50 विद्यार्थियों और 5 शिक्षकों का दल भारत के प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र “इसरो” (श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश) एवं विशाखापट्टनम के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया। यह भ्रमण 05 नवंबर से 10 नवंबर 2025 तक आयोजित हुआ।
इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के प्रति समझ, रुचि और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना था। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने रॉकेट प्रक्षेपण परिसर (लॉन्च पैड), मिशन कंट्रोल सेंटर और सैटेलाइट इंटीग्रेशन सेंटर का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इसरो के वैज्ञानिकों से संवाद कर भारत के अंतरिक्ष अभियानों — चंद्रयान, मंगलयान और गगनयान मिशन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान विद्यार्थियों को इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री शुभांशु शुक्ला से सौजन्य भेंट करने का अवसर मिला। श्री शुक्ला ने विद्यार्थियों को भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक चुनौतियों और तकनीकी नवाचारों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत के विजन को सशक्त बना रहा है और नई पीढ़ी को इसमें योगदान देने के लिए आगे आना चाहिए।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न तकनीकी प्रयोगों को नजदीक से देखा और वैज्ञानिकों से अपने प्रश्न पूछे। विद्यार्थियों ने बताया कि इस यात्रा ने उन्हें प्रेरित किया है कि वे भी भविष्य में विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपना योगदान दें।
इस शैक्षणिक यात्रा ने विद्यार्थियों के मन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि इसरो जैसे संस्थान का कार्य देखकर उन्हें भारत की तकनीकी प्रगति पर गर्व महसूस हुआ।
इस अवसर पर शिक्षकों ने भी कहा कि इस प्रकार के भ्रमण विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक से बाहर वास्तविक ज्ञान और प्रेरणा प्रदान करते हैं, जिससे उनमें शोध और नवाचार की भावना विकसित होती है।