छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना कांकेर का आह्वान — “एकता और अस्मिता की रक्षा के लिए आगे आएं”

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने कांकेर जिले में सांस्कृतिक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। संगठन ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से प्रेरित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की भाषा, परंपरा और अस्मिता की रक्षा के लिए जनता को एकजुट करने का प्रयास है।

Nov 5, 2025 - 20:08
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छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना कांकेर का आह्वान — “एकता और अस्मिता की रक्षा के लिए आगे आएं”

UNITED NEWS OF ASIA. राजेन्द्र मंडावी, कांकेर। छत्तीसगढ़ की मिट्टी, भाषा और संस्कृति की अस्मिता को सहेजने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने कांकेर जिले में एक व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह पहल किसी राजनीतिक लाभ या विरोध के लिए नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, बोली-बानी और सामाजिक एकता के संरक्षण के लिए एक जनआंदोलन के रूप में संचालित की जा रही है।

संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में जिले के गांवों, कस्बों और वार्डों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जन-जागरूकता रैलियाँ, विचार-गोष्ठियाँ, सांस्कृतिक आयोजन, लोककला प्रदर्शन और सामाजिक संवाद सत्र शामिल होंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य युवाओं और समाज के सभी वर्गों में छत्तीसगढ़ी भाषा, परंपरा और गौरव के प्रति सम्मान और जुड़ाव की भावना को सशक्त बनाना है।

संगठन की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि —
“छत्तीसगढ़ की असली पहचान उसकी माटी, बोली, तीज-त्योहार, नाचा-गीत और लोकनृत्य में बसती है। यह हमारी आत्मा है और इसे संरक्षित रखना हम सबका दायित्व है। आधुनिकता के दौर में हमारी संस्कृति और परंपराएं कहीं खो न जाएं, इसके लिए हर छत्तीसगढ़िया को आगे आना होगा।”

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने गांव-गांव और शहरी वार्डों में स्थानीय इकाइयाँ गठित करने, भाषा-प्रचार अभियान चलाने, और नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ी बोली सीखने व बोलने के लिए प्रेरित करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि सांस्कृतिक गौरव तभी जीवित रह सकता है जब समाज एकजुट होकर अपनी जड़ों को पहचानने का संकल्प ले।

संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया —
“हम छत्तीसगढ़िया हन। अपन अस्मिता, अपनी संस्कृति और अपनी माटी की रक्षा खातिर संगठित होके काम करबो। हमर अभियान किसी दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि अपन पहचान के संरक्षण के लिए है।”

संगठन ने यह भी कहा कि आने वाले समय में कांकेर सहित पूरे बस्तर अंचल में ‘छत्तीसगढ़िया गौरव यात्रा’ निकाली जाएगी, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, तीज-त्योहार और लोकगीतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया जाएगा।

अभियान के समापन में संगठन ने जिलेवासियों से शांति, एकता और सम्मान के साथ इस जनआंदोलन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक सशक्त, जागरूक और संगठित समाज ही अपनी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा कर सकता है।

संगठन ने नारा दिया —
“एकता हमर पहचान, स्वाभिमान हमर सम्मान”