सिद्ध बाबा मेले को लेकर विवाद गहराया, आय-व्यय में पारदर्शिता और महिला साधु के अधिकारों पर कलेक्टर से जांच की मांग
मनेंद्रगढ़ स्थित सिद्ध बाबा मंदिर और वार्षिक मेले के प्रबंधन को लेकर स्थानीय नागरिक ने कलेक्टर से शिकायत कर आय-व्यय की जांच और महिला साधु के अधिकार बहाल करने की मांग की है।
UNITEDE NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर,कोरिया | छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में स्थित प्रसिद्ध सिद्ध बाबा मंदिर और 14 जनवरी से प्रारंभ होने वाले वार्षिक सिद्ध बाबा मेले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिक द्वारा जिला कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपते हुए मंदिर और मेले के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा महिला साधु के अधिकारों की बहाली की मांग की गई है।
शिकायत पत्र में सबसे अहम मुद्दा मेले और मंदिर की आय-व्यय व्यवस्था को लेकर उठाया गया है। सिद्ध बाबा मेला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-43 के समीप आयोजित होता है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं। आवेदक का आरोप है कि मंदिर में चढ़ावे और मेले से होने वाली आय का कोई सार्वजनिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह संदेह बना रहता है कि एकत्रित राशि का उपयोग किस उद्देश्य से और किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि शासन स्वयं इस आय-व्यय की संपूर्ण जांच कर इसकी जानकारी सार्वजनिक करे, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
शिकायत में महिला साधु के अधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आवेदक के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व तक मंदिर परिसर में एक महिला साधु निवास करती थीं और धार्मिक सेवाओं में सक्रिय थीं, लेकिन बाद में उनसे उनके अधिकार छीन लिए गए। आरोप लगाया गया है कि वर्तमान में मंदिर और मेले का संचालन नरहरि दास सेवा समिति या संकट मोचन सेवा समिति के नाम से किया जा रहा है, जबकि इन समितियों को संचालन का अधिकार किस आधार पर मिला, यह स्पष्ट नहीं है। ज्ञापन में मांग की गई है कि महिला साधु को उनका पूर्व स्थान, सम्मान और अधिकार पुनः दिलाया जाए।
आवेदक ने यह भी उल्लेख किया कि इससे पूर्व 19 जनवरी 2025 को महामहिम राज्यपाल को सौंपे गए प्रतिवेदन के संदर्भ में भी प्रशासन को आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस बात को लेकर प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जाहिर की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिद्ध बाबा मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी आयोजन में पारदर्शिता और निष्पक्षता आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करता है और क्या मेले के पहले कोई ठोस निर्णय सामने आता है।