बैठक के दौरान अधिकारियों ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से धमतरी जिले सहित अन्य क्षेत्रों में महानदी के जल उपयोग की वर्तमान स्थिति से ट्रिब्यूनल के सदस्यों को अवगत कराया। इसमें सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जल प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की गई। ट्रिब्यूनल की चेयरमैन बेला एम त्रिवेदी ने अधिकारियों से जल उपयोग से संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करते हुए आवश्यक जानकारी ली।
इस अवसर पर ट्रिब्यूनल के सदस्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन एवं इंदरमीत कौर भी उपस्थित रहे। साथ ही उड़ीसा राज्य की टीम के सदस्य, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा सर्वोच्च न्यायालय से जुड़े प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो (IAS), कलेक्टर अबिनाश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
अपने धमतरी प्रवास के दौरान ट्रिब्यूनल की चेयरमैन और अन्य सदस्यों ने मां अंगारमोती मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना भी की। इस अवसर पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने उन्हें मां अंगारमोती का छायाचित्र भेंट कर उनका स्वागत किया।
इसके पश्चात ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने गंगरेल बांध का दौरा किया और वहां बोटिंग का आनंद लिया। साथ ही मुरुमसिल्ली बांध का निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बांध के निर्माण, इतिहास और तकनीकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुरुमसिल्ली बांध लगभग 100 वर्ष से अधिक पुराना है और आज भी मजबूती के साथ कार्य कर रहा है। यह एशिया का पहला सायफन आधारित बांध माना जाता है, जिसकी ट्रिब्यूनल सदस्यों ने सराहना की।
प्रवास के दौरान मुरुमसिल्ली बांध स्थित रेस्ट हाउस में लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया गया। इस प्रदर्शनी में सिहावा पर्वत पर स्थित श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली, जिले में उपलब्ध चावल की विभिन्न किस्में, पारंपरिक हरेली तिहार, काष्ठ शिल्प, माटी कला, जिले में स्थापित राइस मिल, गंगरेल बांध, मिनी गोवा, राजिम कुंभ और चंपारण की झलक प्रस्तुत की गई थी। ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने इन सभी प्रदर्शनों को रुचि के साथ देखा और जिले की सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासत की सराहना की।
अंत में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने ट्रिब्यूनल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके धमतरी प्रवास को यादगार बनाया। इस बैठक को महानदी के जल प्रबंधन और दोनों राज्यों के बीच समन्वय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।