मामले के अनुसार मैथ्यू वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक भारत में वीजा के जरिए पहुंचे थे। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने आवश्यक अनुमति के बिना मिजोरम जैसे संरक्षित और प्रतिबंधित सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रवेश किया। इसके बाद उनके म्यांमार की सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने का भी आरोप लगाया गया है। NIA की जांच के दौरान विदेशी नागरिकों की गतिविधियों और सीमा क्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। चार्जशीट में विदेशी नागरिकों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उनका सवाल है कि अगर गिरफ्तारी के समय अमेरिकी नागरिक पर आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे, तो बाद में चार्जशीट दाखिल करते समय UAPA की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। जयराम रमेश ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आरोपों में बदलाव किया गया या किसी अन्य वजह से UAPA के प्रावधान हटाए गए।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस मामले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी नागरिक के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोप भारत और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय बैठकों के बाद हटाए गए। सिंघवी ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर अवैध रूप से सीमा पार करने, हथियारबंद समूहों से संबंध रखने और ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग लेने जैसे आरोप थे, तो चार्जशीट के स्तर पर उन आरोपों की स्थिति क्या रही, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि गिरफ्तारी के समय मामले को जिस गंभीरता के साथ पेश किया गया था, चार्जशीट में कानूनी धाराओं की स्थिति अलग क्यों दिखाई दे रही है। हालांकि, किसी जांच में प्रारंभिक आरोप और बाद में जांच के आधार पर तय की गई धाराओं में अंतर संभव है। अंतिम तौर पर आरोपों और मामले की कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
मैथ्यू वैन डाइक के मामले को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, वह अमेरिकी नागरिक है और भारत वीजा पर आया था। इसके बाद उसके कुछ यूक्रेनी साथियों के साथ म्यांमार सीमा में प्रवेश करने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में उसके खिलाफ UAPA से जुड़ी कार्रवाई की गई थी, लेकिन करीब 180 दिन बाद NIA की ओर से दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ UAPA के तहत आरोप शामिल नहीं किया गया।
इस घटनाक्रम ने जांच एजेंसी की कार्रवाई, विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों और आतंकवाद विरोधी कानूनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। कांग्रेस जहां सरकार से आरोपों में बदलाव को लेकर जवाब मांग रही है, वहीं मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि आरोपों और जांच के आधार पर अदालत के सामने क्या तथ्य रखे जाते हैं। फिलहाल चार्जशीट में UAPA का प्रावधान नहीं होने को लेकर उठे सवालों ने इस मामले को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया है।