नारायणपुर के छोटेडोंगर में ‘वन संजीवनी क्लिनिक’ स्थापना को लेकर समुदाय सहभागिता बैठक आयोजित
नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर में दूरस्थ और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य सशक्तिकरण के उद्देश्य से समुदाय सहभागिता बैठक आयोजित की गई। बैठक में “वन संजीवनी क्लिनिक” स्थापना की योजना पर चर्चा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार l नारायणपुर जिले के दूरस्थ और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए छोटेडोंगर में समुदाय सहभागिता बैठक आयोजित की गई। ग्राम पंचायत भवन छोटेडोंगर में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित “वन संजीवनी क्लिनिक” की स्थापना के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की योजना पर चर्चा करना था।
कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन ग्राम पंचायत छोटेडोंगर और CureReba Initiatives द्वारा किया गया। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को गांव स्तर तक सुलभ और प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पीवीटीजी समुदायों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
बैठक में छोटेडोंगर सहित आसपास की पांच पंचायतों के सरपंच, जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के कर्मचारी, स्थानीय समुदाय प्रतिनिधि और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता शामिल हुए। सभी ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रस्तावित “वन संजीवनी क्लिनिक” के माध्यम से समुदाय स्तर पर आपातकालीन, निवारक, स्वास्थ्य संवर्धन और उपचारात्मक सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की गई। बताया गया कि इस पहल का उद्देश्य उन ग्रामीण और आदिवासी इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जहां अब तक चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं और लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
CureReba Health and Development Foundation के निदेशक विजय कश्यप ने कहा कि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि समुदाय आधारित स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाकर ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सा सलाहकार डॉ. सिद्धार्थ बिस्वाल ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय गांव स्तर तक पहुंचाना जरूरी है। विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और कुपोषण जैसी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने “वन संजीवनी क्लिनिक” पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के स्वास्थ्य विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। सभी सदस्यों ने इस पहल को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। साथ ही यह भी तय किया गया कि जिला प्रशासन और कलेक्टर से सामूहिक रूप से मुलाकात कर इस परियोजना के लिए प्रशासनिक सहयोग प्राप्त किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध होती हैं तो लोगों को समय पर उपचार मिल सकेगा और गंभीर बीमारियों से होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकेगा। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
नारायणपुर जैसे आदिवासी बहुल और दूरस्थ जिले में इस प्रकार की पहल को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि “वन संजीवनी क्लिनिक” भविष्य में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।