नैनो उर्वरकों से बदली दशरथ वर्मा की खेती, कम लागत में बढ़ा उत्पादन

कबीरधाम जिले के उसलापुर गांव के किसान दशरथ वर्मा ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी अपनाकर खेती में नई मिसाल पेश की है। कम लागत, कम श्रम और बेहतर उत्पादन के साथ उनकी खेती अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

Jun 24, 2026 - 15:55
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नैनो उर्वरकों से बदली दशरथ वर्मा की खेती, कम लागत में बढ़ा उत्पादन

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा l कबीरधाम जिले के ग्राम पंचायत उसलापुर के किसान दशरथ वर्मा ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती में उल्लेखनीय बदलाव किया है। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से उन्होंने न केवल खेती की लागत कम की है, बल्कि उत्पादन और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हासिल किया है। उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

करीब 4.50 एकड़ कृषि भूमि पर धान और गन्ने की खेती करने वाले दशरथ वर्मा पहले पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भर थे। उस समय उन्हें 50 किलोग्राम की भारी बोरियों को दुकान से घर और खेत तक पहुंचाने में काफी कठिनाई होती थी। इसके अलावा भंडारण, परिवहन और अतिरिक्त श्रम की समस्या भी बनी रहती थी। इन चुनौतियों के कारण खेती की लागत बढ़ जाती थी और समय की भी अधिक खपत होती थी।

खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभदायक बनाने के उद्देश्य से उन्होंने नैनो उर्वरकों का उपयोग शुरू किया। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की केवल 500 मिलीलीटर की बोतल को स्प्रेयर के माध्यम से फसल पर छिड़कने से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सीधे प्राप्त होते हैं। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और पोषण का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।

दशरथ वर्मा के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से उनकी खेती की लागत में कमी आई है। पहले जहां भारी मात्रा में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती थी, वहीं अब कम मात्रा में ही बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। इससे श्रम, समय और संसाधनों की बचत भी हो रही है। उन्होंने बताया कि फसल की बढ़वार बेहतर हुई है और उत्पादन में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।

नैनो उर्वरकों का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि इससे पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जबकि नैनो तकनीक आधारित उर्वरक पोषक तत्वों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हैं। इससे भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलता है।

दशरथ वर्मा का मानना है कि खेती में नई तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उनका कहना है कि किसानों को केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि ऐसी तकनीकों को अपनाना चाहिए जो कम लागत में अधिक लाभ देने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हों।

आज उनकी सफलता आसपास के किसानों को भी नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित कर रही है। कृषि क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बना सकते हैं। दशरथ वर्मा की यह पहल इसी दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।