मुनगाडीह पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों पर बवाल, ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुनगाडीह में 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित वित्तीय गड़बड़ी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने सरपंच और तत्कालीन सचिव पर फर्जी तरीके से राशि आहरण करने और जनपद अधिकारियों से मिलीभगत कर जांच प्रभावित करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में विकास कार्य पूरे दिखाए गए हैं, जबकि कई कार्य धरातल पर अधूरे या गायब हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुनगाडीह में 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित वित्तीय गड़बड़ी को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने पंचायत की महिला सरपंच प्रमिला कोराम और तत्कालीन सचिव नेहा आनंद पर सरकारी राशि के दुरुपयोग तथा विकास कार्यों में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही जनपद अधिकारियों पर भी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और आरोपियों को राहत देने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2025-26 में पंचायत को प्राप्त 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग नियमानुसार नहीं किया गया। आरोप है कि कई विकास कार्यों के नाम पर राशि निकाल ली गई, लेकिन धरातल पर अधिकांश कार्य या तो हुए ही नहीं या फिर अधूरे हैं। कुछ कार्यों में लागत से अधिक राशि निकालने का भी आरोप लगाया गया है।
बताया जा रहा है कि 14 मई को पंचायत उप संचालक ने पाली जनपद सीईओ को मामले की जांच के निर्देश दिए थे और तीन दिन के भीतर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच समय पर पूरी नहीं की गई और इस दौरान पंचायत से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव कर कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई।
ग्रामीणों के अनुसार जिन कार्यों को जियोटैग में दिखाकर राशि आहरित की गई थी, उनके लिए बाद में कार्य आदेश, माप पुस्तिका, मस्टररोल और बिल तैयार किए गए। आरोप है कि पंचायत रिकॉर्ड में सभी कार्य पूरे दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्वतंत्र रूप से भौतिक सत्यापन कराया जाए तो अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ जाएगी।
मामले में एक निर्माण कार्य को लेकर विशेष सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि ईंट से किए गए निर्माण के लिए आरसीसी कांक्रीट का बिल प्रस्तुत किया गया है। बताया जा रहा है कि इस मामले में मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया अभी लंबित है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी केवल दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं और मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण नहीं कर रहे।
गांव के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत के कार्यों में सरपंच पति और तत्कालीन सचिव के पिता का हस्तक्षेप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि महिला सरपंच की जगह उनके पति पंचायत के अधिकांश निर्णय लेते हैं और कार्यों का संचालन भी वही करते हैं। इसी तरह तत्कालीन सचिव के पिता द्वारा लेखा-जोखा संभालने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को नेतृत्व का अवसर देने के उद्देश्य से आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन कई पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके परिजन निर्णय लेते दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मुनगाडीह पंचायत में भी यही स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच कर भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया तो वे मामले की शिकायत उच्च स्तर पर करेंगे। फिलहाल पंचायत में कथित भ्रष्टाचार और जांच प्रक्रिया को लेकर गांव में चर्चा का माहौल बना हुआ है।