मतदाता सूची से नाम विलोपित होने पर क्रांतिकारी संगठन के अध्यक्ष डॉ. उमेश ने जताई आपत्ति, पुनः नाम जोड़ने की मांग
महासमुंद में क्रांतिकारी संगठन (काका) के अध्यक्ष डॉ. उमेश ने SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से अपना नाम विलोपित किए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी, SIR अधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी महासमुंद को पत्र सौंपकर नाम तत्काल पुनः जोड़ने की मांग की है। डॉ. उमेश का कहना है कि उन्होंने आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे और वे लंबे समय से मतदान करते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रह चुके व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से किस आधार पर हटाया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से अपना नाम विलोपित किए जाने को लेकर क्रांतिकारी संगठन (काका) के अध्यक्ष डॉ. उमेश ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी, SIR अधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी महासमुंद को पत्र सौंपकर अपना नाम मतदाता सूची में पुनः जोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बावजूद मतदाता सूची से नाम हटाया जाना गंभीर विषय है और निर्वाचन अधिकारियों से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी गई है।
क्रांतिकारी संगठन (काका) की ओर से जारी पत्र क्रमांक 02992/26 के अनुसार डॉ. उमेश ने दावा किया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उन्होंने आवश्यक दस्तावेज संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए थे। इसके बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से विलोपित कर दिया गया। उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि उनका नाम किस आधार और किन कारणों से सूची से हटाया गया।
डॉ. उमेश के अनुसार उनकी जन्मतिथि 5 अप्रैल 1965 है और वे वर्ष 1983 से लगातार विभिन्न चुनावों में मतदान करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके मतदान से संबंधित रिकॉर्ड जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में लंबे समय से मतदाता के रूप में दर्ज व्यक्ति का नाम SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाया है।
मामले में डॉ. उमेश ने वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि वे वर्ष 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में स्वयं प्रत्याशी रह चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वे पूर्व में विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी रहे हैं और लंबे समय से मतदान करते आ रहे हैं, तो वर्तमान मतदाता सूची से उनका नाम किस आधार पर विलोपित किया गया।
उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की जांच कर उनका नाम यथाशीघ्र मतदाता सूची में पुनः जोड़ा जाए। डॉ. उमेश ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता के अधिकार महत्वपूर्ण हैं और मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान के अधिकार से सीधे जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद उनका नाम नहीं जोड़ा गया तो वे कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
क्रांतिकारी संगठन (काका) के संबंध में बताया गया है कि इसकी स्थापना 15 अगस्त 1994 को डॉ. उमेश द्वारा की गई थी और संगठन का मुख्यालय महासमुंद में है। संगठन की ओर से सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया जाता है। संगठन का नारा है, “न हिन्दू, न मुस्लिम, न सिख, न इसाई, हम इंसान हैं सिर्फ भाई-भाई।”
डॉ. उमेश ने अपने बयान में कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बावजूद नाम हटाया जाना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि उनके मतदान का रिकॉर्ड संबंधित कार्यालय में उपलब्ध है और इसकी जांच की जा सकती है। उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए मतदाता सूची में उनका नाम पुनः शामिल करने की मांग की है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2003 में विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रह चुके व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि नाम विलोपन के वास्तविक कारण और प्रक्रिया से संबंधित अंतिम स्थिति निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर स्पष्ट होनी बाकी है।
डॉ. उमेश की ओर से सौंपे गए पत्र की प्रतिलिपि मुख्य चुनाव आयुक्त, नई दिल्ली और राज्य निर्वाचन आयोग, रायपुर को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है। अब देखना होगा कि निर्वाचन विभाग इस शिकायत पर क्या जांच करता है और डॉ. उमेश के नाम को मतदाता सूची में पुनः शामिल करने के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है।
क्रांतिकारी संगठन ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए मतदाता सूची को त्रुटिरहित रखने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।