स्वच्छता पर लाखों खर्च, फिर भी बदहाल शौचालय: खैरागढ़ के वार्ड 18 में जनसुविधा केंद्र बना गंदगी का अड्डा

खैरागढ़ के वार्ड 18 में स्थित सार्वजनिक शौचालय की हालत बेहद खराब हो गई है। नगर पालिका के स्वच्छता दावों के बावजूद यहां गंदगी, बदबू और टूटी सुविधाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं।

Apr 26, 2026 - 13:52
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स्वच्छता पर लाखों खर्च, फिर भी बदहाल शौचालय: खैरागढ़ के वार्ड 18 में जनसुविधा केंद्र बना गंदगी का अड्डा

UNITED NEWS OF ASIA. मनोहर सेन, खैरागढ़ l छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में स्वच्छता को लेकर किए जा रहे दावों की पोल उस समय खुलती नजर आ रही है, जब जमीनी हकीकत सामने आती है। नगर पालिका परिषद हर साल स्वच्छता अभियान के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन शहर के वार्ड नंबर 18 में स्थित सार्वजनिक शौचालय की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

वार्ड 18 में बना यह जनसुविधा केंद्र आज बदहाली का प्रतीक बन चुका है। शौचालय के दरवाजे टूटे हुए हैं, दीवारों पर गंदगी जमी हुई है और चारों ओर असहनीय बदबू फैली रहती है। यहां की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि लोग इसका उपयोग करने से कतराते हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें इसी शौचालय का सहारा लेना पड़ता है।

यह शौचालय शहर के व्यस्त इलाकों में से एक गोल बाजार खैरागढ़ के पास स्थित है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए आते हैं। ऐसे में इस शौचालय का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह आसपास के लोगों और बाहर से आने वाले नागरिकों के लिए एकमात्र सुविधा है। इसके बावजूद इसकी साफ-सफाई और रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर पालिका परिषद के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती है, जबकि वास्तविक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

इस मुद्दे पर वार्ड पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों को खटक रही है। आम नागरिकों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि ही इस तरह की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज करेंगे, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वच्छता अभियान के तहत हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर इस तरह की बदहाल स्थिति क्यों बनी हुई है। क्या ये खर्च सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या फिर योजनाओं के क्रियान्वयन में कहीं गंभीर खामियां हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी से न केवल लोगों को असुविधा होती है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है। गंदगी और अस्वच्छ वातावरण कई बीमारियों को जन्म दे सकता है, जिससे आम जनता प्रभावित होती है।

अब जरूरत है कि नगर पालिका परिषद इस समस्या को गंभीरता से ले और तत्काल सफाई, मरम्मत और नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित करे। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

फिलहाल, खैरागढ़ के वार्ड 18 का यह शौचालय प्रशासन की उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को कब तक नजरअंदाज करते हैं या फिर जल्द ही कोई ठोस कदम उठाकर लोगों