कांकेर में आत्मानंद स्कूल की लापरवाही: कक्षा पहली की छात्रा घंटों तक क्लासरूम में बंद रही, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कांकेर जिले के आत्मानंद प्राथमिक शाला, हरणगढ़ में छुट्टी के बाद कक्षा पहली की छात्रा क्लासरूम में ही बंद रह गई। परिजनों की खोजबीन के बाद शाम को बच्ची को रिहा किया गया। यह घटना स्कूल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेन्द्र मंडावी, कांकेर। कांकेर जिले के हरणगढ़ स्थित आत्मानंद प्राथमिक शाला में सोमवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, कक्षा पहली की एक मासूम छात्रा छुट्टी के बाद क्लासरूम में ही बंद रह गई और घंटों तक अंदर कैद रही।
घटना के अनुसार, सोमवार दोपहर स्कूल की छुट्टी के बाद सभी बच्चे घर लौट गए, लेकिन एक छात्रा गलती से कक्षा के अंदर ही रह गई। बताया गया कि बच्ची रोजाना स्कूल बस से घर लौटती थी। जब वह तय समय पर घर नहीं पहुंची तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने स्कूल बस स्टाफ और अन्य परिजनों से पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।
लगातार खोजबीन के बाद परिजन शाम करीब पांच बजे स्कूल पहुंचे। वहां स्कूल भवन से हल्की रोने की आवाज सुनाई दी। जब दरवाज़ा खोला गया तो बच्ची सहमी हुई हालत में अंदर मिली। तत्काल शिक्षिका और चपरासी को बुलाया गया, जिन्होंने ताला खोलकर बच्ची को बाहर निकाला। बच्ची डरी हुई थी और परिजनों से लिपट कर रोने लगी।
यह घटना केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करती है। आखिर छुट्टी के बाद कक्षा की जांच क्यों नहीं की गई? क्या शिक्षकों ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि सभी बच्चे जा चुके हैं? क्या बस स्टाफ ने उपस्थिति का मिलान नहीं किया?
परिजनों का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा चूक है और भविष्य में ऐसी घटना किसी अन्य बच्चे के साथ न हो, इसके लिए स्कूल प्रबंधन को कड़े कदम उठाने चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग से भी मांग की है कि स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
स्कूल प्रबंधन की ओर से अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में लापरवाही साबित होने पर संबंधित कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना शिक्षा व्यवस्था की उस कमज़ोर कड़ी को उजागर करती है, जहां बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही के गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। शिक्षण संस्थानों में बच्चों की उपस्थिति, छुट्टी प्रक्रिया और परिवहन व्यवस्था को सख्ती से मॉनिटर करना आवश्यक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है —
क्या इस घटना से स्कूल प्रबंधन सबक लेगा?
क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए ठोस सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे?
यह घटना पूरे जिले के लिए चेतावनी है कि स्कूल सुरक्षा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों की ज़िंदगी से जुड़ा संवेदनशील विषय है, जिसे हर संस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए।