समग्र आईडी में जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने का गंभीर मामला, एसडीओ से की गई शिकायत

सिंगरौली जिले के चितरंगी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत खटाई में समग्र आईडी में गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां एक जीवित व्यक्ति को वर्ष 2018 से मृत घोषित कर दिया गया। पीड़ित विश्वनाथ द्विवेदी ने एसडीओ से शिकायत कर जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Jan 8, 2026 - 17:32
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समग्र आईडी में जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने का गंभीर मामला, एसडीओ से की गई शिकायत

UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली | जिले के चितरंगी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत खटाई से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला प्रशासनिक मामला सामने आया है। यहां ग्राम निवासी विश्वनाथ द्विवेदी, पिता सगुनदास द्विवेदी, को शासकीय रिकॉर्ड में वर्ष 2018 से मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वनाथ द्विवेदी की समग्र आईडी क्रमांक 39213231 (मेंबर आईडी 176446773) में दिनांक 4 जुलाई 2018 को उन्हें मृत दर्शा दिया गया। इस त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि के कारण वे बीते लगभग पाँच वर्षों से विभिन्न शासकीय योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित हैं।

पीड़ित ने इस गंभीर त्रुटि को लेकर उपखण्ड अधिकारी (एसडीओ), चितरंगी को लिखित शिकायत सौंपते हुए बताया कि यह गलती पंचायत के तत्कालीन सचिव एवं रोजगार सहायक द्वारा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि समग्र आईडी जैसे संवेदनशील दस्तावेज में बिना सत्यापन के गलत जानकारी दर्ज की गई, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन प्रभावित हुआ है।

आवेदन में यह भी आशंका जताई गई है कि उनके नाम पर अंत्येष्टि सहायता राशि का दुरुपयोग किया गया हो सकता है। यदि ऐसा है, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित न रहकर आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। पीड़ित ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस घटना के सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और समग्र आईडी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। समग्र आईडी शासन की अनेक योजनाओं—जैसे पेंशन, राशन, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा—का आधार है। ऐसे में जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर देना न केवल गंभीर लापरवाही है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों का हनन भी है।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस मामले में कितनी शीघ्रता से सुधारात्मक कार्रवाई होती है और पीड़ित को उसका हक कब तक वापस मिलता है। यह मामला भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए जवाबदेही और सख्त निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।