दिल्ली–NCR प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: निर्माण कार्यों पर रोक से किया इनकार
दिल्ली–NCR में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रोक लगाने से लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। इसके बजाय केंद्र और राज्यों को दीर्घकालिक समाधान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई और CAQM की रिपोर्ट को लागू करने का आदेश भी जारी किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA.दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। बढ़ते प्रदूषण के बीच निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग को कोर्ट ने सख्ती से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली और NCR में लाखों लोग निर्माण गतिविधियों पर निर्भर हैं और ऐसे में सभी परियोजनाओं को बंद करना व्यावहारिक नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने साफ कहा, “हम ऐसा नहीं कर सकते। दिल्ली में विभिन्न राज्यों से आए बड़ी संख्या में लोग इन निर्माण कार्यों से अपनी आजीविका कमाते हैं। इतने बड़े स्तर पर बंदी का आदेश देना संभव नहीं है।” कोर्ट ने यह भी दोहराया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल ‘तात्कालिक प्रतिबंध’ समाधान नहीं है, बल्कि केंद्र और राज्यों को दीर्घकालिक योजनाएँ बनानी होंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण में CAQM (Commission for Air Quality Management) की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा कि दिल्ली–NCR की हवा की स्थिति के आधार पर यह संस्था पहले से ही उपयुक्त कदम उठाती है, और उन्हीं के अनुसार आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि निर्माण पर व्यापक रोक लगाने जैसी कार्रवाई अनेक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव डाल सकती है।
मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए स्थायी समाधान तैयार किए जाएँ। CJI ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों—जैसे पराली जलाना, वाहनों का धुआँ, औद्योगिक उत्सर्जन और सड़क धूल—पर लगातार और सख्त नियंत्रण ही हवा सुधारने का एकमात्र रास्ता है।
उन्होंने कहा, “पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पराली जलाने की घटनाएं रोकना अत्यावश्यक है। केवल निर्माण कार्यों पर रोक टिकाऊ समाधान नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना आवश्यक है।”
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों को आदेश दिया है कि वे 13 नवंबर 2025 की CAQM रिपोर्ट में दिए गए निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू करें, विशेषकर पराली जलाने को रोकने हेतु त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों के लिए पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपाय समय पर उपलब्ध हों, ताकि प्रदूषण बढ़ने से रोका जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को एक दिन का समय दिया है ताकि वह विस्तृत और व्यावहारिक दीर्घकालिक समाधान पर अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत कर सके। अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र को वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए एकीकृत नीति और योजना तैयार करनी होगी, जिसमें कृषि, परिवहन, उद्योग और शहरी विकास सभी क्षेत्रों को शामिल किया जाए।
मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दिल्ली–NCR कई दिनों से गंभीर श्रेणी की AQI का सामना कर रहा है, जिससे आम जीवन प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने और टिकाऊ समाधान पर जोर देने वाला है।