केल्हारी पंचायत में ‘रेट लिस्ट’ घोटाले का आरोप: बोली के बाद बढ़ाए गए शुल्क, उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के केल्हारी ग्राम पंचायत में बाजार वसूली की नीलामी के बाद रेट लिस्ट बदलने का मामला सामने आया है। व्यापारियों ने इसे अनियमितता और धोखाधड़ी बताते हुए प्रशासन से जांच की मांग की है।

Apr 5, 2026 - 15:21
 0  1
केल्हारी पंचायत में ‘रेट लिस्ट’ घोटाले का आरोप: बोली के बाद बढ़ाए गए शुल्क, उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र सुकला।   केल्हारी ग्राम पंचायत में साप्ताहिक बाजार वसूली को लेकर एक विवाद सामने आया है, जिसने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला से जुड़ा है, जहां वर्ष 2026-27 के लिए बाजार वसूली की नीलामी प्रक्रिया के बाद अचानक रेट लिस्ट में बदलाव किए जाने के आरोप लगे हैं।

ग्रामीणों और व्यापारियों के अनुसार, नीलामी प्रक्रिया से पहले जो रेट लिस्ट सार्वजनिक रूप से चस्पा की गई थी, उसमें विभिन्न दुकानों के लिए शुल्क अपेक्षाकृत कम निर्धारित था। इसी आधार पर व्यापारियों ने नीलामी में भाग लिया और बोली लगाई। लेकिन जैसे ही नीलामी प्रक्रिया पूरी हुई, एक नई रेट लिस्ट सामने आई, जिसमें अधिकांश दुकानों के शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी गई।

उदाहरण के तौर पर, बड़ी किराना दुकानों का शुल्क 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया। मछली दुकानों के लिए 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया, जबकि बर्तन दुकानों के लिए 30 रुपये से सीधे 100 रुपये तक शुल्क बढ़ा दिया गया। इसी तरह मुर्गा दुकानों का शुल्क भी 70 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया।

इस पूरे मामले में दो अलग-अलग रेट लिस्ट की तस्वीरें सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। पहली सूची में कम दरें दिखाई गई थीं, जबकि दूसरी सूची में दरों में भारी वृद्धि स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बोली प्रक्रिया के बाद अचानक दरों में बदलाव क्यों किया गया।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि पहले से ही बढ़ी हुई दरें बताई जातीं, तो नीलामी प्रक्रिया और बोली की स्थिति पूरी तरह अलग होती। उनका आरोप है कि यह छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों के साथ अन्याय है, जो सीमित संसाधनों में अपना व्यवसाय चलाते हैं।

इस मामले में पंचायत प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों ने पंचायत सचिव गंगाराम और सरपंच आशा पाव की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया है और आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के बिना संचालित की गई।

ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि पंचायत का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को सुविधा देना और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना होना चाहिए, लेकिन यहां उल्टा व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

वहीं, इस पूरे मामले पर संबंधित अधिकारियों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। अब नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो यह मामला पंचायत स्तर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।

कुल मिलाकर, केल्हारी पंचायत का यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है, जहां अब लोग निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।