बीते दो वर्षों में जिले की कुल 14,356 छात्राओं को इस योजना के अंतर्गत निःशुल्क साइकिलें प्रदान की गई हैं। इस पहल का सबसे अधिक लाभ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की बालिकाओं को मिला है, जहां पहले स्कूल तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। खराब रास्ते, बारिश के मौसम में फिसलन और समय की कमी के कारण छात्राओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
दूरस्थ गांवों में रहने वाली अनेक छात्राओं के लिए यह स्थिति इतनी कठिन थी कि वे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाती थीं और कई बार पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाती थीं। अब साइकिल मिलने के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। छात्राएं कम समय में, बिना थके और सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंच रही हैं। इससे न केवल उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हुई है, बल्कि पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह और लगाव भी बढ़ा है।
छात्राओं का कहना है कि अब वे समय पर स्कूल पहुंच जाती हैं और पहले जैसी थकान महसूस नहीं होती। कक्षा में उनका मन अधिक लगता है और वे पढ़ाई को बेहतर तरीके से समझ पा रही हैं। कई छात्राओं ने बताया कि साइकिल मिलने से उन्हें घर के कामों और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने में भी मदद मिल रही है। स्कूल से लौटने के बाद वे परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटा लेती हैं और फिर अपने अध्ययन के लिए पर्याप्त समय निकाल पाती हैं।
अभिभावकों के लिए भी यह योजना राहत लेकर आई है। पहले बेटियों को दूर पैदल भेजने को लेकर सुरक्षा की चिंता बनी रहती थी। अब समूह में साइकिल से स्कूल जाती बेटियों को देखकर माता-पिता स्वयं को अधिक निश्चिंत महसूस कर रहे हैं। इससे परिवारों में बेटियों की शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच और मजबूत हुई है।
आज जिले की सड़कों पर साइकिल चलाकर स्कूल जाती बेटियां आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और समान अवसरों की नई तस्वीर पेश कर रही हैं। वे न केवल अपने सपनों की ओर आगे बढ़ रही हैं, बल्कि समाज में यह संदेश भी दे रही हैं कि सुविधाएं मिलने पर बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं।
सरस्वती साइकिल योजना केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने की एक प्रभावी पहल बन चुकी है। यह योजना ड्रॉपआउट दर को कम करने, विद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिले में यह योजना सच मायनों में बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनती जा रही है और बालिका शिक्षा को नई गति देने वाली एक प्रेरणादायक पहल के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है।