कातलबोड़ का निःशुल्क करियर शिविर बना ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम

धमतरी जिले के ग्राम कातलबोड़ में आयोजित निःशुल्क शैक्षिक एवं करियर मार्गदर्शन शिविर ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। शिविर में शिक्षा, संस्कार, करियर काउंसलिंग और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की दिशा में मार्गदर्शन दिया गया।

May 25, 2026 - 17:23
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कातलबोड़ का निःशुल्क करियर शिविर बना ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले के ग्राम कातलबोड़ में आयोजित निःशुल्क शैक्षिक एवं करियर मार्गदर्शन शिविर आज ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई दिशा देने वाला प्रेरक अभियान बन गया है। साहू समाज बांनगर परिक्षेत्र द्वारा कर्मचारी प्रकोष्ठ के निर्देशन में संचालित यह शिविर शिक्षा, संस्कार, करियर जागरूकता और सामाजिक सुधार का अनूठा संगम बनकर उभरा है। गांवों में सकारात्मक बदलाव लाने की इस पहल ने बच्चों के भीतर आत्मविश्वास और बड़े लक्ष्य हासिल करने की नई उम्मीद जगाई है।

समापन समारोह में कलेक्टर Avinash Mishra ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने पालकों से अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखते हुए शिक्षा और अच्छे संस्कारों की ओर प्रेरित करें। उन्होंने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कक्षा आठवीं में लगाया गया एक समर कैंप उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था।

कलेक्टर ने विद्यार्थियों को संघर्ष से सीखने, असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे मजबूत बनने और सफलता मिलने पर विनम्र बने रहने की सीख दी। उनके प्रेरक संबोधन ने बच्चों के भीतर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया। कार्यक्रम में एसडीएम नभ कुमार कोसले भी मौजूद रहे।

चार वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह शिविर अब ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए उम्मीद का केंद्र बन चुका है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा मार्गदर्शन, कक्षा 9वीं से 12वीं तक कठिन विषयों की पढ़ाई, नैतिक शिक्षा, संगीत प्रशिक्षण और करियर काउंसलिंग जैसी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिले के कई अधिकारी, शिक्षक और विशेषज्ञ बिना किसी मानदेय के बच्चों को समय देकर उनके भविष्य को संवारने में जुटे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत “मैं हूं गुल्लक अभियान” से हुई, जिसमें समाजसेवी तुमनचंद साहू और रंजीता साहू ने 300 बच्चों को गुल्लक और पेंटिंग किट वितरित की। गुल्लक पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपने सपनों और सामाजिक सरोकारों को रंगों के माध्यम से व्यक्त किया। किसी बच्चे ने आईएएस बनने का सपना चित्रित किया तो किसी ने डॉक्टर, सैनिक, व्यवसायी और पर्यावरण रक्षक बनने की इच्छा दिखाई। जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और पक्षी बचाओ जैसे विषयों पर बच्चों की सोच ने सभी को प्रभावित किया।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए श्रेष्ठ प्रतिभागियों को मेडल और पुस्तकें देकर सम्मानित किया। पूरे आयोजन के दौरान बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास और बड़े सपनों की चमक साफ दिखाई दी।

शिविर की सबसे बड़ी ताकत सामुदायिक सहभागिता रही। ग्रामीणों और समाज के सहयोग से बच्चों के लिए स्वल्पाहार, परिवहन और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था की गई। कर्मचारी प्रकोष्ठ द्वारा तैयार “कर्म ग्रंथालय” में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी लगभग डेढ़ लाख रुपये मूल्य की पुस्तकें विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

यह शिविर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुधार का भी मजबूत माध्यम बन रहा है। बच्चों और युवाओं को नशा, मोबाइल की लत और विद्यालय पलायन जैसी समस्याओं से दूर रखने के लिए संस्कार एवं मूल्य शिक्षा की नियमित कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा करियर संबंधी मार्गदर्शन देकर युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

ग्राम कातलबोड़ का यह प्रयास आज इस बात का उदाहरण बन चुका है कि यदि समाज, प्रशासन और शिक्षक मिलकर संकल्प लें तो गांवों के बच्चे भी बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं।