कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक को लेकर सियासत गरमाई, AAP और NSUI ने उठाए सवाल
रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर के एंटोमोलॉजी विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और WhatsApp पर वायरल होने के आरोप के बाद विवाद बढ़ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित प्रश्नपत्र को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। मामले को लेकर आम आदमी पार्टी और NSUI ने स्वतंत्र जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र वायरल होने के आरोप के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर के एंटोमोलॉजी यानी कीट विज्ञान विषय के प्रश्नपत्र के परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले सोशल मीडिया और WhatsApp के माध्यम से वायरल होने का मामला सामने आया है। विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित प्रश्नपत्र को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है।
मामले को लेकर आम आदमी पार्टी और NSUI ने विश्वविद्यालय प्रशासन की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने आरोप लगाया कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचना विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलनों और पहले सामने आ चुके विवादों के बावजूद यदि परीक्षा से कुछ घंटे पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर पहुंच जाता है तो परीक्षा प्रणाली की निगरानी और गोपनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
AAP ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। संगठन ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021, पटवारी से राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा 2024, CSVTU की फार्मेसी परीक्षा 2025, गरियाबंद ओपन परीक्षा और जुलाई 2026 में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार से परीक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग की।
AAP ने एंटोमोलॉजी पेपर लीक मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच, डिजिटल और तकनीकी जांच, जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई तथा प्रभावित छात्रों की परीक्षा पारदर्शी तरीके से दोबारा कराने की मांग की है।
वहीं मामले को लेकर NSUI ने प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नोटों की माला और डायपर लेकर विरोध जताया। NSUI का आरोप है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2022 और 2024 में भी प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई थीं और अब फिर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र WhatsApp पर वायरल होने का मामला सामने आया है।
NSUI ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने, प्रश्नपत्र वायरल होने के स्रोत का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने कहा कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आना विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मेहनत से परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए।
NSUI ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
जिला अध्यक्ष रायपुर प्रशांत गोस्वामी ने कहा कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले वायरल होना मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की मांग की।
फिलहाल मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय सामने आया है। अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस माध्यम से बाहर आया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामले ने प्रदेश में परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और विश्वविद्यालयों की परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।