बिलासपुर प्रेस क्लब के “हमर पहुना” कार्यक्रम में डॉ. ललित माखीजा ने साझा किया जीवन का संघर्ष और सेवा का सफर

बिलासपुर प्रेस क्लब के “हमर पहुना” कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष एवं नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. ललित माखीजा ने अपने जीवन, शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक सफर से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी निश्चित मंजिल के बजाय सही दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहना जरूरी है। उन्होंने काम के लिए पद को जरूरी नहीं बताया और लक्ष्य के साथ कर्म पर ध्यान देने की बात कही। इस दौरान उन्होंने बिलासपुर प्रेस क्लब के सदस्यों के लिए ओपीडी फीस निःशुल्क करने की घोषणा भी की।

Aug 23, 2026 - 07:28
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बिलासपुर प्रेस क्लब के “हमर पहुना” कार्यक्रम में डॉ. ललित माखीजा ने साझा किया जीवन का संघर्ष और सेवा का सफर

UNITED NEWS OF ASIA. विशु तिवारी, बिलासपुर l बिलासपुर प्रेस क्लब के परंपरागत कार्यक्रम “हमर पहुना” में विश्व हिंदू परिषद छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष एवं प्रख्यात नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. ललित माखीजा शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने बचपन, शिक्षा, चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश, संघर्ष, सामाजिक जीवन और संगठनात्मक सफर से जुड़े अनुभव पत्रकारों के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी एक मंजिल को हासिल करना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि सही दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहना ही जीवन का वास्तविक सूत्र है।

कार्यक्रम की शुरुआत में बिलासपुर प्रेस क्लब की ओर से डॉ. ललित माखीजा का स्वागत और अभिनंदन किया गया। इसके बाद उन्होंने सहज अंदाज में अपने जीवन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उनका परिवार बड़ा था और परिवार में पढ़ाई करने वाले वे पहले लड़के थे। उन्होंने उड़िया रेलवे क्षेत्र मिडिल स्कूल से आठवीं तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद गुरुनानक स्कूल और भारतमाता स्कूल में पढ़ाई जारी रखी।

डॉ. माखीजा ने बताया कि उनके जीवन में ऐसा संघर्ष नहीं रहा कि भोजन या फीस की चिंता करनी पड़ी हो, लेकिन सही दिशा बताने वाला विशेष मार्गदर्शन उन्हें नहीं मिला। परिवार की किराना दुकान में भी वे समय मिलने पर सहयोग करते थे। उनके अनुसार इस अनुभव ने उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों को समझने और उनके साथ जुड़ने का अवसर दिया।

उन्होंने अपने मेडिकल करियर की शुरुआत का भी रोचक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि उनके मित्र डॉ. श्रीकांत गिरी के साथ उनका पॉलिटेक्निक में चयन हुआ था। शिक्षक देवेंद्र शेमानी ने दोनों को पॉलिटेक्निक के बजाय 12वीं के बाद इंजीनियरिंग करने की सलाह दी। इसी दौरान 12वीं में उन्होंने बायोलॉजी विषय ले लिया और इसके बाद पीएमटी की तैयारी शुरू की। धीरे-धीरे उनका सफर चिकित्सा क्षेत्र की ओर बढ़ता गया और उन्होंने रायपुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया।

हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के कारण अंग्रेजी माध्यम की मेडिकल शिक्षा उनके लिए शुरुआती दौर में चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाला और चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

जीवन को लेकर अपनी सोच बताते हुए डॉ. माखीजा ने कहा कि उन्होंने कभी दूसरे लोगों की उपलब्धियों या जीवनशैली को देखकर अपने लिए चीजें तय नहीं कीं। उनके अनुसार जब व्यक्ति दूसरों से अपनी तुलना करने लगता है, तभी उसे अपने जीवन में कमी महसूस होने लगती है। उन्होंने कहा कि जो काम हाथ में है, उसे पूरी ईमानदारी और क्षमता के साथ करना चाहिए।

उन्होंने जीवन की दिशा को समझाने के लिए दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटे रास्ते का उदाहरण दिया और कहा कि सीधी रेखा सबसे सरल रास्ता होती है। उनका जीवन-सूत्र रहा है, “In life, go straight and turn right.” उन्होंने इसका अर्थ बताते हुए कहा कि जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और परिस्थितियां बदलने पर जरूरत के अनुसार सही दिशा में मोड़ लेने से भी नहीं डरना चाहिए।

डॉ. माखीजा ने कहा कि काम करने के लिए पद जरूरी नहीं है। उन्होंने अपने संगठनात्मक अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों सहित विभिन्न राज्यों में उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलीं। छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, बिहार और अन्य क्षेत्रों में भी उन्होंने संगठनात्मक कार्य किया। विश्व हिंदू परिषद में जिम्मेदारी स्वीकार करने के संबंध में उन्होंने कहा कि जहां दायित्व मिले, वहां पूरी क्षमता और ईमानदारी से काम करना उनका सिद्धांत रहा है।

उन्होंने लक्ष्य और परिणाम के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि लक्ष्य रखना गलत नहीं है, लेकिन परिणाम को लेकर अत्यधिक आग्रह व्यक्ति को परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने से रोक सकता है। विद्यार्थी का लक्ष्य परीक्षा में सफल होना हो सकता है, लेकिन उसके हाथ में मेहनत और तैयारी है, परिणाम नहीं। चिकित्सा क्षेत्र में भी उनका उद्देश्य केवल बड़ा अस्पताल या अधिक आय अर्जित करना नहीं, बल्कि बिलासपुर और छत्तीसगढ़ में बेहतर नेत्र चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना है।

विश्व हिंदू परिषद की भूमिका पर उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज को जागरूक, संस्कारित, समरस और सेवाभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यों को केवल पद या राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक जागरूकता और सेवा के कार्यों में योगदान दे।

हिंदुत्व से जुड़े सवाल पर डॉ. माखीजा ने कहा कि हिंदू समाज को अपने मूल मूल्यों को समझने और उन्हें जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने जागरूकता और सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि किसी से लड़ना उद्देश्य नहीं है, लेकिन समाज का जागृत रहना जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने डॉ. माखीजा से उनके व्यक्तिगत जीवन, चिकित्सा क्षेत्र, संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक गतिविधियों और समसामयिक विषयों पर संवाद किया। “हमर पहुना” कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व के उस पक्ष को सामने लाया गया, जिसमें उपलब्धियों से अधिक दायित्व, संतोष, सेवा और सही दिशा में निरंतर आगे बढ़ने को महत्व दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. ललित माखीजा ने बिलासपुर प्रेस क्लब के सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष के लेटरपैड या अधिकृत आदेश के आधार पर प्रेस क्लब के सदस्यों की ओपीडी फीस निःशुल्क की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अध्यक्ष के अनुरोध पर उपचार में भी हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने की बात उन्होंने कही।

डॉ. माखीजा की इस पहल पर बिलासपुर प्रेस क्लब ने उनका आभार व्यक्त किया। प्रेस क्लब ने कहा कि पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की यह पहल सराहनीय है और इससे प्रेस क्लब के सदस्यों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।