कोण्डागांव पुलिस ने 46 साइबर मितानों को दिया प्रशिक्षण, साइबर फ्रॉड से बचाव के बताए तरीके
कोण्डागांव पुलिस ने साइबर अपराधों की रोकथाम और आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचाने के उद्देश्य से 46 साइबर मितानों को प्रशिक्षण दिया। पुलिस लाइन कोण्डागांव में आयोजित प्रशिक्षण में UPI/QR कोड फ्रॉड, OTP/KYC फ्रॉड, फेक कस्टमर केयर, इन्वेस्टमेंट स्कैम, जॉब फ्रॉड, लोन फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया फ्रॉड, फेक प्रोफाइल, ऑनलाइन ब्लैकमेल और AI/डीपफेक जैसे साइबर अपराधों की जानकारी दी गई। साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोण्डागांव l बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम के लिए कोण्डागांव पुलिस ने एक नई पहल करते हुए 46 साइबर मितानों को विशेष प्रशिक्षण दिया। पुलिस लाइन कोण्डागांव में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य साइबर मितानों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों की जानकारी देना और उन्हें आम नागरिकों तक साइबर सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी पहुंचाने के लिए तैयार करना था।
प्रशिक्षण के दौरान साइबर मितानों को ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों और उनसे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।
प्रशिक्षण में UPI और QR Code Fraud, OTP तथा KYC Fraud, Fake Customer Care, Investment Scam, Job Fraud, Loan Fraud, Digital Arrest, Social Media Fraud, Fake Profile, Online Blackmail और AI/Deepfake जैसे साइबर अपराधों के बारे में जानकारी दी गई। साइबर मितानों को बताया गया कि ठग किस तरह लोगों को अलग-अलग बहानों से अपने जाल में फंसाते हैं और बैंकिंग या निजी जानकारी हासिल कर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
साइबर मितानों को यह भी समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, ATM PIN, CVV, बैंक संबंधी जानकारी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसी तरह अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध QR कोड स्कैन करने और सोशल मीडिया पर अज्ञात लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के बारे में भी जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए। इसके साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने और पीड़ित को राहत दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
साइबर मितानों को प्रशिक्षण देने में अभिनव उपाध्याय, SDOP एवं सोशल मीडिया मॉनिटरिंग नोडल अधिकारी, सिद्धार्थ बघेल, डीएसपी साइबर सेल, सौरभ उपाध्याय, निरीक्षक एवं प्रभारी साइबर सेल तथा आरक्षक मनीष बॉस सहित साइबर सेल की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशिक्षण के दौरान साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध की रोकथाम और पीड़ित सहायता से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम नागरिकों में जागरूकता होना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि साइबर मितान पुलिस और जनता के बीच साइबर जागरूकता की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे।
पुलिस अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर मितान पुलिस के विकल्प नहीं, बल्कि पुलिस के सहयोगी हैं। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना और साइबर ठगी के शिकार लोगों को सही समय पर पुलिस या साइबर सेल तक पहुंचाने में मदद करना है।
प्रशिक्षण में शामिल साइबर मितानों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने, साइबर ठगी के नए तरीकों की जानकारी देने और पीड़ितों को तत्काल शिकायत की प्रक्रिया समझाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में साइबर मितान चांदनी बघेल और संतु कुंजाम सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। पुलिस की इस पहल से जिले में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।