स्कूल जतन योजना में बड़ा घोटाला: 72.60 लाख खर्च कागजों में, जमीन पर अधूरे भवन
गरियाबंद जिले में स्कूल जतन योजना के तहत 72.60 लाख रुपये के निर्माण कार्यों में बड़ा घोटाला सामने आया है। कागजों में भवन तैयार दिखाए गए, जबकि जमीनी हकीकत में सिर्फ अधूरी नींव और गड्ढे मिले हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद । गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। "स्कूल जतन योजना" के तहत लाखों रुपये खर्च कर स्कूल भवन निर्माण का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आई।
सबसे प्रमुख मामला शासकीय प्राथमिक शाला कुकरार का है, जहां लगभग 16 लाख रुपये की लागत से नए स्कूल भवन का निर्माण होना था। लेकिन मौके पर सिर्फ खुदी हुई नींव और अधूरा ढांचा दिखाई देता है। इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में निर्माण कार्य को “छज्जा लेवल” तक पूर्ण दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आया है कि आसपास के कई गांवों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां की गई हैं। हथौड़ाडीह में 20 लाख रुपये, नगरार में 16 लाख रुपये और जोबपारा में 20 लाख रुपये के निर्माण कार्य कागजों में पूरे दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविक स्थिति में वहां भी अधूरे या नगण्य कार्य ही पाए गए हैं। इस तरह कुल 72.60 लाख रुपये के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन बच्चों के लिए यह स्कूल बनाए जाने थे, उनका भविष्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। बदहाल व्यवस्था और अधूरी इमारतों के कारण बच्चों को शिक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उनके कार्यकाल में फाइलों में निर्माण कार्य को पूर्ण दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। हालांकि अब इस मामले की जांच शुरू हो चुकी है।
वर्तमान सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह जनता के विश्वास को और कमजोर कर सकता है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या वास्तव में इन स्कूलों का निर्माण पूरा कर बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल मिल पाएगा।