करोड़ों की लागत, सड़क गायब! गरियाबंद में PMGSY प्रोजेक्ट पर उठे भ्रष्टाचार के सवाल
गरियाबंद जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़क तय समय सीमा के बाद भी अधूरी पड़ी है। 2.37 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क को लेकर ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. राधेसियम पटेल गरियाबंद। जिले से विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को उजागर करने वाली एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जा रही सड़क आज भी अधूरी पड़ी है, जबकि इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है।
मामला NH-130C डूमरपड़ाव से ग्राम पंचायत जांगड़ा को जोड़ने वाली सड़क का है। इस परियोजना के तहत 4.70 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण किया जाना था, जिसके लिए 237.70 लाख रुपये (करीब 2.37 करोड़ रुपये) की राशि स्वीकृत की गई थी। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत 30 दिसंबर 2024 को हुई थी और इसे 29 दिसंबर 2025 तक पूरा किया जाना था।
हालांकि, तय समय सीमा बीतने के कई महीने बाद भी सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। जमीनी स्थिति यह दर्शाती है कि सड़क का बड़ा हिस्सा अब भी कच्चा है और कई जगहों पर निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। महज 4.70 किलोमीटर की सड़क को पूरा करने में एक साल से अधिक समय लगने के बावजूद कार्य अधूरा रहना गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस परियोजना में केवल सड़क ही नहीं, बल्कि पुल-पुलियों का निर्माण भी शामिल था। लेकिन इनका काम भी अधूरा छोड़ दिया गया है। इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है, खासकर बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं। कीचड़ और गड्ढों से भरे रास्तों से गुजरना लोगों के लिए मजबूरी बन गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के बनने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद थी। बेहतर सड़क से आवागमन आसान होता, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बेहतर होती। लेकिन अधूरी सड़क ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह परियोजना अधूरी क्यों है? क्या यह पैसा केवल कागजों में ही खर्च दिखाया गया है? यदि काम समय पर पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की चुप्पी भी संदेह को और गहरा करती है। पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही का अभाव इस परियोजना को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य पूरा किया जाए। उनका कहना है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलेगा, वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
कुल मिलाकर, गरियाबंद का यह मामला विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में ग्रामीणों को उनकी बहुप्रतीक्षित सड़क मिल पाती है या नहीं।