मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई थी। अखंड रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और जय श्री राम व हनुमान जी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे थे और प्रसाद ग्रहण कर रहे थे।
खेड़ापति मंदिर के साथ-साथ शहर के अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। पुरानी मंडी स्थित हनुमान मंदिर में भी सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला और हर कोई इस पावन अवसर पर पूजा-अर्चना कर रहा था।
इस अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों पर भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और श्रद्धालुओं की सेवा की। जगह-जगह भंडारे में श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद वितरित किया गया, जिससे पूरे शहर में सेवा और भक्ति का माहौल बना रहा।
विशेष रूप से, बस्तर सहित छत्तीसगढ़ से सशस्त्र नक्सलवाद की समाप्ति के संकल्प की पूर्ति के उपलक्ष्य में खेड़ापति हनुमान मंदिर प्रांगण में सुबह 11 बजे से विशेष हनुमंत भंडारे का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश में स्थापित शांति और सुरक्षा के लिए ईश्वर का आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर लोगों ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रयासों तथा विष्णुदेव साय के नेतृत्व को इस उपलब्धि से जोड़कर देखा। वहीं, विजय शर्मा ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में इस आयोजन में शामिल होने की अपील की।
आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही। पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
इसके अलावा, कार्यक्रम में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को याद किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रदेश में शांति, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की।
कुल मिलाकर, कवर्धा में हनुमान जन्मोत्सव का यह आयोजन भक्ति, सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा, जहां श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और धार्मिक आस्था का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।