गरियाबंद में प्रसूता की मौत पर बवाल, निजी अस्पताल के खिलाफ चक्काजाम

गरियाबंद जिले के देवभोग स्थित देवमाता प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान एक प्रसूता की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर प्रदर्शन किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के विरोध में नेशनल हाईवे 130सी पर चक्काजाम किया गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने में जुटे रहे।

May 27, 2026 - 11:39
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गरियाबंद में प्रसूता की मौत पर बवाल, निजी अस्पताल के खिलाफ चक्काजाम

UNITED NEWS OF ASIA. गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में स्थित देवमाता प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान एक प्रसूता की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। विरोध इतना बढ़ गया कि लोगों ने नेशनल हाईवे 130सी पर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।

मृतिका की पहचान 30 वर्षीय भानुमति मांझी के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर उचित इलाज नहीं मिलने और चिकित्सकीय लापरवाही के कारण प्रसूता की मौत हुई है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।

बताया जा रहा है कि प्रसूता को उपचार के लिए देवमाता प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर सही उपचार मिलता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। इसी बात को लेकर अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ लोगों में आक्रोश फैल गया।

घटना की जानकारी आसपास के गांवों में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बाद में आक्रोशित लोगों ने देवभोग-गरियाबंद मुख्य मार्ग स्थित नेशनल हाईवे 130सी पर चक्काजाम कर दिया।

चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्री और वाहन चालक घंटों तक जाम में फंसे रहे। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया तथा मामले की जांच का आश्वासन दिया।

पुलिस प्रशासन ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और यदि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं और यदि निजी अस्पतालों में भी लापरवाही होगी तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।

फिलहाल पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रशासन द्वारा परिजनों से लगातार बातचीत की जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।