गणेशगढ़ चौकी प्रभारी पर अभद्रता के आरोप, पंचायत सचिव संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के गणेशगढ़ पुलिस चौकी प्रभारी पर पंचायत सचिव के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप लगे हैं। पंचायत सचिव संघ ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

Apr 7, 2026 - 15:41
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गणेशगढ़ चौकी प्रभारी पर अभद्रता के आरोप, पंचायत सचिव संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में स्थित गणेशगढ़ पुलिस चौकी एक विवाद के चलते सुर्खियों में आ गई है। यहां के चौकी प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर छत्तीसगढ़ पंचायत सचिव संघ ने गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का कहना है कि चौकी प्रभारी द्वारा एक पंचायत सचिव के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है।

इस मामले को लेकर पंचायत सचिव संघ ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जनपद स्तर पर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

शिकायत के अनुसार, यह घटना 5 अप्रैल 2026 की है। ग्राम पंचायत महराजगंज में पदस्थ पंचायत सचिव श्री उत्तम समादार शासकीय कार्य के सिलसिले में गणेशगढ़ पुलिस चौकी पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद चौकी प्रभारी ने उनके साथ न केवल असम्मानजनक व्यवहार किया, बल्कि अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया।

संघ का दावा है कि यह घटना सार्वजनिक रूप से हुई और उस समय पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ग्राम पंचायत महराजगंज के सरपंच और पंच इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी बताए जा रहे हैं। ऐसे में संघ का कहना है कि मामले की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पंचायत सचिव संघ ने अपने ज्ञापन में इस घटना को कर्मचारी के सम्मान और अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि एक लोक सेवक के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल अनुचित है, बल्कि इससे कर्मचारियों का मनोबल भी गिरता है और वे मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस करते हैं।

संघ ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित चौकी प्रभारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले के पंचायत सचिवों में नाराजगी का माहौल है। वे इस मुद्दे को लेकर एकजुट नजर आ रहे हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने की बात कह रहे हैं।

वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ हुए दुर्व्यवहार का नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन और आपसी सम्मान बनाए रखने का भी है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह विवाद और बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर, यह घटना प्रशासनिक तंत्र के भीतर समन्वय और मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।