मेड़ेसरा में रोजगार सह आवास दिवस का आयोजन, “मोर तरिया – आय के जरिया” पर जोर

दुर्ग जिले के मेड़ेसरा गांव में रोजगार सह आवास दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें “मोर तरिया – आय के जरिया” अभियान के तहत जल संरक्षण और आय के नए स्रोतों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में 10 नए तालाबों की स्वीकृति भी दी गई।

Apr 7, 2026 - 17:26
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मेड़ेसरा में रोजगार सह आवास दिवस का आयोजन, “मोर तरिया – आय के जरिया” पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल। दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड अंतर्गत ग्राम मेड़ेसरा में रोजगार सह आवास दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और आजीविका के नए अवसरों पर व्यापक चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत “मोर तरिया – आय के जरिया” पहल को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बजरंग कुमार दुबे, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग उपस्थित रहे। उनके साथ जनप्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर उपाध्यक्ष पवन शर्मा, जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र साहू, सरपंच राजेश्वरी देशलहरे, नटवर ताम्रकार सहित आसपास के ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिवगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान “मोर तरिया – आय के जरिया” अभियान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। इस पहल का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत विकसित करना भी है। तालाब (तरिया) निर्माण और उनके बेहतर प्रबंधन से मत्स्य पालन, सिंचाई और अन्य गतिविधियों के जरिए आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

इस अवसर पर महिला स्व-सहायता समूहों के साथ विशेष चर्चा की गई और उन्हें इस अभियान से जोड़ने की रणनीति बनाई गई। समूहों को बताया गया कि वे किस प्रकार “मोर तरिया” योजना के तहत कार्य कर अपने लिए स्थायी आय के स्रोत विकसित कर सकती हैं।

कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि 10 नए तरिया (तालाब) निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। इससे आने वाले समय में क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।

ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी भी दी गई। डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देते हुए हितग्राहियों को QR कोड स्कैन कर योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। इससे ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी आसानी से और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगी।

इसके अलावा, कार्यक्रम में सोख्ता गड्ढों के निर्माण पर भी जोर दिया गया, जिससे वर्षा जल का संरक्षण किया जा सके और भूजल स्तर में सुधार हो। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल संरक्षण के इन उपायों को अपनाकर अपने गांव को जल संपन्न बनाएं।

युवाओं की भागीदारी को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि यदि युवा इस पहल में सक्रिय रूप से जुड़ते हैं, तो जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के प्रयासों को और अधिक गति मिल सकती है।

कुल मिलाकर, मेड़ेसरा में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाने वाला रहा, बल्कि इससे ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरणा भी मिली। “मोर तरिया – आय के जरिया” अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और आर्थिक विकास का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।