एकता नगर बना पर्यटन आधारित विकास का मॉडल, खेती से आगे बढ़कर रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिली नई पहचान

गुजरात का एकता नगर पर्यटन आधारित विकास का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सरदार सरोवर परियोजना के बाद यहां स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, महिला सशक्तीकरण, हरित परिवहन और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास हुआ है।

Jul 26, 2026 - 12:46
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एकता नगर बना पर्यटन आधारित विकास का मॉडल, खेती से आगे बढ़कर रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिली नई पहचान

UNITED NEWS OF ASIA. एकता नगर (गुजरात)। कभी कृषि और पशुपालन पर आधारित रहने वाला एकता नगर आज देश के सबसे सफल पर्यटन आधारित विकास मॉडलों में शामिल हो चुका है। सरदार सरोवर परियोजना और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण के बाद इस क्षेत्र ने विकास की नई दिशा पकड़ी है। अब यहां पर्यटन केवल आकर्षण का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और हरित विकास का प्रमुख आधार बन गया है।

पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित गुजरात अध्ययन दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने एकता नगर का भ्रमण किया। इस दौरान स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एरिया डेवलपमेंट एंड टूरिज्म गवर्नेंस अथॉरिटी (SOUADTG) के अतिरिक्त कलेक्टर नारायण मधु ने बताया कि पूरे क्षेत्र का विकास एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यटन, नागरिक सुविधाओं, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को एक साथ जोड़कर समग्र विकास सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि एकता नगर के विकास की नींव सरदार सरोवर परियोजना से पड़ी। बांध निर्माण के बाद उपलब्ध भूमि का उपयोग सुनियोजित तरीके से पर्यटन और आधुनिक आधारभूत संरचना विकसित करने में किया गया। वर्ष 2018 में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के उद्घाटन के बाद यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभरा। वर्तमान में यहां लगभग 27 प्रमुख पर्यटन आकर्षण विकसित किए जा चुके हैं और भविष्य में इनकी संख्या और बढ़ाने की योजना है।

पर्यटन के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय लोगों को मिला है। पहले अधिकांश परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर थे, लेकिन अब होटल, पर्यटन सेवाओं, परिवहन, गाइड, सुरक्षा, हाउसकीपिंग, निर्माण और अन्य क्षेत्रों में हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। स्थानीय महिलाएं गुलाबी ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं, जबकि युवाओं को पर्यटन उद्योग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार मिल रहा है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से कौशल विकास केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। यहां ड्राइविंग, टूरिस्ट गाइड, फ्रंट डेस्क संचालन, ब्यूटी सर्विस, फूड एंड बेवरेज सहित कई क्षेत्रों में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

एकता नगर में पर्यावरण संरक्षण को भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। यहां 55 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा ई-रिक्शा, ई-बाइक, इलेक्ट्रिक गोल्फ कार और इलेक्ट्रिक स्कूटर जैसी पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हैं। शहर में चार्जिंग स्टेशन, स्मार्ट बस स्टॉप, साइकिल ट्रैक और पैदल मार्ग विकसित किए गए हैं, जिससे पर्यटकों को सुविधाजनक और प्रदूषण मुक्त परिवहन उपलब्ध हो सके।

हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए पिछले पांच वर्षों में लगभग 40 लाख पौधे लगाए गए हैं। एकता नर्सरी, मियावाकी वन और शहरी घने वन जैसी योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की गई है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन आकर्षण भी बढ़ा है।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए होटल और आतिथ्य क्षेत्र का भी तेजी से विस्तार हुआ है। वर्तमान में यहां लगभग 3,000 कमरों की आवासीय क्षमता उपलब्ध है। पीक पर्यटन सीजन के दौरान प्रतिदिन 80 हजार से एक लाख तक पर्यटक यहां पहुंचते हैं। उनकी सुविधा के लिए आधुनिक पार्किंग, सूचना केंद्र, टिकटिंग काउंटर, प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड, रेडियो सेवा, व्हीलचेयर, बेबी स्ट्रोलर और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

एकता नगर के विकास का मॉडल यह दर्शाता है कि यदि पर्यटन को सुनियोजित ढंग से स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जाए तो वह किसी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन सकता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने जहां भारत की एकता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया है, वहीं उसके आसपास विकसित एकता नगर आज रोजगार, सतत विकास और आधुनिक पर्यटन का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।