दीपक बैज ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की, यूसीसी और विस्थापन के मुद्दे पर सरकार को घेरा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने नीट विवाद, विस्थापन, आदिवासी अधिकारों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

Jul 26, 2026 - 12:51
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दीपक बैज ने प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की, यूसीसी और विस्थापन के मुद्दे पर सरकार को घेरा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्र और राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देशभर में सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध और छात्रों-युवाओं के आंदोलनों को देखते हुए प्रधानमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उनका दावा था कि सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है और अब उसके पास सत्ता में बने रहने का नैतिक आधार नहीं बचा है।

दीपक बैज ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के विभिन्न शहरों तक छात्र और युवा लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनके अनुसार यह स्थिति सरकार के प्रति जनता के असंतोष को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

पत्रकार वार्ता में उन्होंने राज्य में विस्थापन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप था कि रायपुर के नकटी, सूरजपुर, हसदेव, तमनार, छुईखदान और बस्तर सहित कई क्षेत्रों में लोगों को उनकी जमीनों से हटाने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सूरजपुर में कोयला परियोजना के लिए ग्रामीणों के विरोध के दौरान पुलिस बल प्रयोग की घटना चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी विकास परियोजना के लिए लोगों का विस्थापन आवश्यक हो तो प्रभावित परिवारों को विश्वास में लेकर उचित पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। केवल प्रशासनिक बल प्रयोग के माध्यम से लोगों को हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रस्तावित लागू होने के मुद्दे पर भी दीपक बैज ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है, जिसे संविधान के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है। उनके अनुसार पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची और संरक्षित जनजातियों को मिले संवैधानिक अधिकारों को किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि यूसीसी लागू किया जाता है तो आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया और पांडा जैसी विशेष संरक्षित जनजातियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

दीपक बैज ने सरकार से कई सवाल पूछते हुए स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने पूछा कि यूसीसी लागू होने के बाद क्या पेसा कानून पूर्ववत प्रभावी रहेगा, क्या पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत पंचायतों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, क्या संरक्षित जनजातियों को मिले विशेष संवैधानिक अधिकारों में कोई बदलाव नहीं होगा और क्या आदिवासी समुदाय के सामुदायिक भूमि अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में उद्योगों के विस्तार की आड़ में जमीनों पर कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं। उनका कहना था कि विकास योजनाओं के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान किया जाना आवश्यक है।

पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार से आदिवासी अधिकारों, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास नीति और यूसीसी जैसे विषयों पर स्पष्ट नीति सार्वजनिक करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार को पारदर्शी और जवाबदेह रवैया अपनाना चाहिए।