प्रारंभिक चरण में कैंसर का इलाज कम आक्रामक क्यों होता है? जानिए इसके फायदे | डॉ. अखिलेश साहू

डॉ. अखिलेश साहू बताते हैं कि यदि कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था में चल जाए तो उसका उपचार कम आक्रामक, अधिक लक्षित और शरीर पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव डालने वाला होता है। इससे मरीज को जल्दी स्वस्थ होने, बेहतर जीवन गुणवत्ता बनाए रखने और दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से बचने में मदद मिलती है।

Feb 28, 2026 - 12:42
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प्रारंभिक चरण में कैंसर का इलाज कम आक्रामक क्यों होता है? जानिए इसके फायदे | डॉ. अखिलेश साहू

UNITED NEWS OF ASIA . अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | कैंसर कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह कई प्रकार की बीमारियों का समूह है। इसका उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर का पता किस चरण में चला है। आमतौर पर कैंसर का नाम सुनते ही लोगों के मन में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी कठिन प्रक्रियाओं का डर बैठ जाता है। लेकिन यदि कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था में चल जाए, तो उसका इलाज अपेक्षाकृत कम आक्रामक, अधिक प्रभावी और शरीर पर कम बोझ डालने वाला हो सकता है।

क्या होता है प्रारंभिक चरण का कैंसर?

प्रारंभिक चरण का कैंसर वह होता है, जो अपने मूल अंग तक ही सीमित रहता है और शरीर के अन्य हिस्सों या लसीका ग्रंथियों तक नहीं फैला होता। इस अवस्था में ट्यूमर का आकार छोटा होता है और वह उपचार के प्रति अधिक संवेदनशील रहता है। इसी कारण डॉक्टर व्यापक और कठोर इलाज की बजाय लक्षित तथा सीमित उपचार की योजना बना पाते हैं।

सीमित सर्जरी की अधिक संभावना

शुरुआती चरण में ट्यूमर छोटा होने के कारण उसे आसपास के स्वस्थ ऊतकों को सुरक्षित रखते हुए हटाया जा सकता है। इससे बड़े और जटिल ऑपरेशन की आवश्यकता कम हो जाती है। कई मामलों में अंगों को सुरक्षित रखते हुए भी इलाज संभव होता है। ऐसी सर्जरी से दर्द कम होता है, अस्पताल में रहने की अवधि घटती है और मरीज जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।

कीमोथेरेपी और रेडिएशन की जरूरत क्यों कम होती है?

जब कैंसर शरीर में फैलने लगता है, तब कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी आक्रामक चिकित्सा पद्धतियों की आवश्यकता अधिक होती है। लेकिन शुरुआती अवस्था में ट्यूमर पूरी तरह हट जाने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में कई मरीजों को इन उपचारों की आवश्यकता नहीं पड़ती या फिर कम अवधि और कम खुराक में ही इलाज पर्याप्त होता है।

बेहतर जीवन गुणवत्ता

कम आक्रामक उपचार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। शारीरिक कमजोरी, थकान, संक्रमण और मानसिक तनाव जैसे दुष्प्रभाव अपेक्षाकृत कम होते हैं। मरीज जल्दी अपने परिवार, कार्य और सामाजिक जीवन में सक्रिय हो पाता है। यह विशेष रूप से बुजुर्गों, कामकाजी लोगों और पहले से अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का कम जोखिम

कठोर और लंबे समय तक चलने वाले कैंसर उपचार कई बार तंत्रिका तंत्र की क्षति, हृदय संबंधी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन या प्रजनन से जुड़ी परेशानियां पैदा कर सकते हैं। जब इलाज सीमित और लक्षित होता है, तो इन दीर्घकालिक जोखिमों की संभावना भी काफी हद तक कम हो जाती है।

उपचार के अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं

कैंसर का जल्दी पता चलने पर डॉक्टरों के पास मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जरूरत के अनुसार उपचार चुनने के कई विकल्प होते हैं। इनमें न्यूनतम चीर-फाड़ वाली सर्जरी, लक्षित थेरेपी या कुछ विशेष परिस्थितियों में सक्रिय निगरानी जैसे विकल्प भी शामिल हो सकते हैं। उन्नत अवस्था में ये विकल्प सीमित रह जाते हैं और आक्रामक इलाज अनिवार्य हो जाता है।

स्क्रीनिंग की भूमिका क्यों है अहम?

अधिकांश कैंसर शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देते। इसलिए नियमित जांच और स्क्रीनिंग बेहद जरूरी होती है। समय पर की गई जांच से कैंसर को प्रारंभिक अवस्था में पकड़ा जा सकता है, जिससे कठिन और लंबे इलाज की जगह सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपचार संभव हो पाता है।

निष्कर्ष

कैंसर का प्रारंभिक चरण में पता चलना न केवल इलाज को कम आक्रामक बनाता है, बल्कि मरीज को बेहतर जीवन, तेजी से रिकवरी और कम दुष्प्रभावों का अवसर भी देता है। जागरूकता और नियमित जांच के माध्यम से हम कई लोगों का जीवन सुरक्षित और स्वस्थ बना सकते हैं।