जिला चिकित्सालय बेमेतरा के एसएनसीयू में प्रीमेच्योर नवजात का सफल उपचार, सैकड़ों बच्चों के लिए जीवनदायिनी बनी विशेष इकाई

जिला चिकित्सालय बेमेतरा स्थित 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में संचालित एसएनसीयू विभाग प्रीमेच्योर और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई एवं सीएमएचओ डॉ. अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन में अब तक लगभग 1500 नवजातों का सफल इलाज किया जा चुका है।

Feb 28, 2026 - 15:23
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जिला चिकित्सालय बेमेतरा के एसएनसीयू में प्रीमेच्योर नवजात का सफल उपचार, सैकड़ों बच्चों के लिए जीवनदायिनी बनी विशेष इकाई

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा | बेमेतरा जिले के 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में संचालित एस.एन.सी.यू. (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) आज जिले के नवजात शिशुओं के लिए संजीवनी बनकर उभरा है। स्वास्थ्य विभाग, जिला बेमेतरा द्वारा संचालित इस विशेष इकाई में समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित स्टाफ के माध्यम से सफल उपचार किया जा रहा है।

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन में सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. लोकेश साहू के नेतृत्व में जिला चिकित्सालय के एमसीएच भवन में संचालित एसएनसीयू विभाग लगातार उत्कृष्ट सेवाएं दे रहा है।

एसएनसीयू विभाग में अब तक लगभग 1500 से अधिक नवजात शिशुओं को विभिन्न गंभीर बीमारियों के कारण भर्ती कर उपचार किया जा चुका है। इनमें प्रमुख रूप से जन्म के तुरंत बाद न रोना या देर से रोना, मीकोनियम एस्पिरेशन, पीलिया, सांस लेने में परेशानी, शॉक, मस्तिष्क संबंधी जटिलताएं, जन्मजात विकृतियां, हाइपोथर्मिया, हाइपोग्लाइसीमिया, झटके आना, ब्लीडिंग और डायरिया जैसी समस्याएं शामिल हैं।

इन सभी मामलों में सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण श्रेणी प्रीमेच्योर और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की होती है। ऐसे शिशुओं को बचा पाना अत्यंत कठिन होता है और उन्हें लंबे समय तक गहन देखभाल की आवश्यकता होती है। एसएनसीयू में अब तक लगभग 159 प्रीमेच्योर एवं कम वजन वाले नवजात शिशुओं को भर्ती कर सफल उपचार के बाद सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज किया गया है।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार निराला एवं प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ द्वारा इन नवजातों की सतत निगरानी और उपचार किया जाता है। उपचार के साथ-साथ माताओं को एसएनसीयू स्थित मदर यूनिट में रखा जाता है, जहां उन्हें शिशु की देखभाल, स्तनपान की सही विधि, दूध पिलाने के बाद डकार दिलाने का महत्व तथा कंगारू मदर केयर (केएमसी) के बारे में निरंतर काउंसलिंग दी जाती है। इसका उद्देश्य नवजात का सुरक्षित एवं लक्षित वजन बढ़ाना तथा संक्रमण से बचाव सुनिश्चित करना है।

एसएनसीयू की सफलता का एक उदाहरण ग्राम डगनिया, विकासखंड बेरला निवासी वामिनी बारले की नवजात बच्ची है, जिसे मात्र 0.900 किलोग्राम वजन के साथ 6 जनवरी को एसएनसीयू में भर्ती किया गया था। लगभग एक माह तक गहन उपचार और सतत देखभाल के बाद छुट्टी के समय उसका वजन बढ़कर 1.530 किलोग्राम हो गया, जो इस इकाई की कार्यक्षमता को दर्शाता है।

वर्तमान में एमसीएच भवन में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में पदस्थ डॉ. नीतेश चौबे के आने से जिले में नवजात एवं शिशु रोग उपचार सुविधाओं में और अधिक विस्तार हुआ है।

स्वच्छता को लेकर सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू ने बताया कि मातृ एवं शिशु अस्पताल में गर्भवती महिलाओं, प्रसव कक्ष तथा नवजात शिशुओं की देखभाल के दौरान स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी स्वच्छता गाइडलाइन के अनुसार सभी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं, जिससे जच्चा-बच्चा को किसी भी प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।

जिला चिकित्सालय बेमेतरा का एसएनसीयू विभाग आज जिले के सैकड़ों परिवारों के लिए उम्मीद और विश्वास का केंद्र बन चुका है।