कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई के आदेशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बेमेतरा द्वारा की गई।
कार्यशाला में विकासखंड नवागढ़, बेरला एवं बेमेतरा के जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी व्योम श्रीवास्तव द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य पत्र में 16 जनवरी 2025 को जारी अधिसूचना के माध्यम से राज्य के समस्त ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत अब ग्राम स्तर पर बाल विवाह की रोकथाम, सूचना संकलन, शिकायत प्राप्त होने पर त्वरित कार्रवाई, संबंधित विभागों को सूचना देना तथा आवश्यकता होने पर पुलिस व प्रशासन से समन्वय स्थापित करना सचिवों की प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की बालिका तथा 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह प्रतिबंधित है। यदि कोई व्यक्ति बाल विवाह करता है, करवाता है अथवा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहयोग करता है, तो उसे दो वर्ष तक के कठोर कारावास या एक लाख रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 10 मार्च 2024 को संकल्प पारित कर 31 मार्च 2029 तक राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर चरणबद्ध जनजागरूकता और जनसहभागिता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जिले के शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, धर्मगुरुओं, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम पंचायतों के सहयोग से बाल विवाह के विरुद्ध निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिले की 417 ग्राम पंचायतों एवं 8 नगरीय निकायों द्वारा विगत दो वर्षों से एक भी बाल विवाह नहीं होने के संबंध में प्रस्ताव पारित कर स्वयं को बाल विवाह मुक्त घोषित किया गया है। यह पहल जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत सचिवों से आग्रह किया गया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सतर्क रहकर किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना तत्काल संबंधित विभागों को दें और सक्रिय भूमिका निभाते हुए बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करें। कार्यक्रम में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई और सभी संबंधितों से सजगता एवं सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।