दुर्ग के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय लकड़ी तस्कर, अब आम के फलदार पेड़ों पर भी मंडराया खतरा
दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी तस्करों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। प्रतिबंधित कौहा वृक्षों के बाद अब तस्करों की नजर आम के फलदार पेड़ों पर है। वन विभाग ने अवैध परिवहन के दौरान चार मेटाडोर वाहनों को जब्त किया है, जबकि लगातार हो रही अवैध कटाई पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. भारती कौर, दुर्ग l दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों लकड़ी तस्करों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। पहले जहां तस्करों का निशाना प्रतिबंधित प्रजाति के कौहा वृक्ष हुआ करते थे, वहीं अब उनकी नजर आम के फलदार पेड़ों पर भी पड़ गई है। खेतों और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में आम के पेड़ों की अवैध कटाई की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे किसानों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है।
जानकारों के अनुसार तस्कर ग्रामीण क्षेत्रों में खड़े वर्षों पुराने फलदार वृक्षों को निशाना बना रहे हैं। आम के पेड़ न केवल किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद अवैध कटाई का सिलसिला लगातार जारी है। कई स्थानों पर खेतों में लगे फलदार पेड़ों को काटकर लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है।
वन विभाग ने हाल ही में अवैध लकड़ी परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए धमधा और जामुल क्षेत्र से चार मेटाडोर वाहनों को जब्त किया है। इन वाहनों में आम के फलदार वृक्षों के गोले लदे हुए पाए गए। विभाग ने वाहनों को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लकड़ी की वैधता और कटाई से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में लंबे समय से अवैध कटाई का कारोबार चल रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग और संबंधित प्रशासनिक अमला पर्याप्त निगरानी नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण तस्करों के हौसले बुलंद हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी होने से अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है। एक ओर जहां पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर फलदार और छायादार वृक्षों की अवैध कटाई चिंता को और बढ़ा रही है। पेड़ों की संख्या कम होने से तापमान में वृद्धि, भूजल स्तर में गिरावट और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने प्रशासन से अवैध कटाई के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल वाहनों की जब्ती पर्याप्त नहीं है, बल्कि कटाई करने वाले गिरोहों और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचकर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
वन विभाग ने भी संकेत दिए हैं कि जिले में निगरानी बढ़ाई जाएगी और अवैध कटाई व परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों की नजर टिकी हुई है, ताकि जिले की हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।