कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान, कुलगीत एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सत्र का संचालन प्रो. एम. वसीम खान ने किया। मुख्य अतिथियों में इंदौर के सांसद Shankar Lalwani, सेंट्रल GST के एडिशनल कमिश्नर दिनेश बिसेन, DAVV की कार्यपरिषद सदस्य ए. के. द्विवेदी, Pithampur Industrial Association के अध्यक्ष गौतम कोठारी तथा स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के डायरेक्टर प्रो. कन्हैया आहूजा उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि “विकसित भारत” के निर्माण का स्पष्ट रोडमैप है। 4.4 प्रतिशत फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन और संतुलित विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस से इंदौर जैसे उभरते औद्योगिक शहरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की बात कही गई। साथ ही Delhi, Hyderabad और Nagpur जैसे प्रमुख शहरों से बेहतर रेल एवं लॉजिस्टिक संपर्क से व्यापार और उद्योग को नई गति मिलने की संभावना व्यक्त की गई।
प्रो. कन्हैया आहूजा ने युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास, स्टार्ट-अप प्रोत्साहन तथा स्वरोजगार योजनाओं को बजट की प्रमुख विशेषताएं बताया। उन्होंने मानव पूंजी विकास, रोजगार सृजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार में निवेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक बताया।
डॉ. दिनेश बिसेन ने GST और कस्टम ड्यूटी की संरचना, राजस्व सृजन में उनकी भूमिका तथा आर्थिक स्थिरता में योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
गौतम कोठारी ने औद्योगिक माहौल को मजबूत करने और विशेष रूप से पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ करने की आवश्यकता रेखांकित की।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि आर्थिक प्रगति के लिए “हेल्थ और वेल्थ” दोनों का संतुलन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बेहतर कनेक्टिविटी, परिवहन नेटवर्क और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का आधार बताया।
डॉ. ए. के. द्विवेदी ने प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और वेलनेस की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए AYUSH पद्धतियों—आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—को भारत की सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक विरासत बताया। उन्होंने इंदौर में National Institute of Homeopathy की स्थापना का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश सहित पूरे देश को उच्च स्तरीय शिक्षा, अनुसंधान और उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी। इस प्रस्ताव को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने का आश्वासन भी दिया गया।
कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें बजट की प्राथमिकताओं, सुशासन, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रभावों पर खुली चर्चा की गई। यह आयोजन छात्रों और समाज के लिए बजट की जटिलताओं को सरलता से समझने और नीति-निर्माण प्रक्रिया से जुड़ने का एक प्रभावी मंच सिद्ध हुआ।