कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं, कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं किए जाने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी का लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए और पेट्रोल, डीजल, सीएनजी तथा रसोई गैस की कीमतों में तत्काल राहत दी जानी चाहिए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी नहीं किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल सस्ता होने के बावजूद देश में उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले की तुलना में काफी कम हो चुकी हैं। उनके अनुसार एक समय कच्चे तेल की कीमत लगभग 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि वर्तमान में यह करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है। उनका दावा है कि कीमतों में उल्लेखनीय कमी आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में अपेक्षित राहत नहीं दी गई है।
कांग्रेस का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया जा रहा है। सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यदि ईंधन की कीमतों में कमी की जाती तो इसका सीधा असर परिवहन लागत, कृषि लागत और विभिन्न उद्योगों की उत्पादन लागत पर पड़ता। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी राहत मिलने की संभावना रहती।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं की गई। कांग्रेस का कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बना हुआ है।
सुशील आनंद शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तब ईंधन के दाम अपेक्षाकृत जल्दी बढ़ा दिए जाते हैं, लेकिन कीमतों में गिरावट आने पर उपभोक्ताओं को उसी अनुपात में राहत नहीं मिलती। उन्होंने इसे आम जनता के हितों के विपरीत बताते हुए सरकार से पारदर्शी मूल्य निर्धारण की मांग की।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन महंगा होने से खाद्य पदार्थों, कृषि उत्पादों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ता है। पार्टी का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों में कमी की जाए तो महंगाई पर नियंत्रण पाने में भी मदद मिल सकती है।
प्रेस विज्ञप्ति में सुशील आनंद शुक्ला ने केंद्र सरकार से पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रसोई गैस की कीमतों में तत्काल कमी करने की मांग की। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए।
हालांकि, ईंधन की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं होतीं। इनमें विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन व्यय, केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कर तथा विपणन कंपनियों की लागत जैसे कई अन्य कारक भी शामिल होते हैं। कांग्रेस ने अपने बयान में इन सभी पहलुओं के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।