MCB में नकली धान बीज पैकिंग का आरोप, मनवारी में किसानों से जुड़ी गंभीर शिकायतों की जांच की मांग
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के ग्राम पंचायत मनवारी में कथित रूप से नकली धान बीज की पैकिंग और बिक्री की तैयारी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट में कृषि विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत का भी दावा किया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. हेमंत कुमार, मनेंद्रगढ़ l छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के ग्राम पंचायत मनवारी से धान बीज से जुड़े एक गंभीर मामले के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि गांव में कथित रूप से साधारण धान को ब्रांडेड और सरकारी बीज के नाम से पैक कर बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर किसानों की खेती और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, कथित तौर पर एक स्थान पर साधारण धान को नामी कंपनियों और सरकारी बीज जैसे दिखने वाले पैकेटों में भरकर तैयार किया जा रहा है। आरोप है कि इन पैकेटों को असली बीज बताकर अधिक कीमत पर किसानों को बेचने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में धान की बोआई का समय होने के कारण बीजों की मांग बढ़ी हुई है और इसी स्थिति का लाभ उठाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
मामले में यह आरोप भी लगाए गए हैं कि कृषि विभाग के कुछ जिला स्तरीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर ऐसा काम संभव नहीं हो सकता। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज, जांच रिपोर्ट या प्रशासनिक पुष्टि सार्वजनिक नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान नकली या निम्न गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग करते हैं तो अंकुरण दर कम हो सकती है और फसल उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। इससे किसानों की बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर की गई पूरी लागत प्रभावित होने का खतरा रहता है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऐसी स्थिति आर्थिक रूप से बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है।
धान की खेती छत्तीसगढ़ के अधिकांश किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में बीजों की गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी किसानों के विश्वास और कृषि व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर विषय मानी जाती है। विशेषज्ञ समय-समय पर किसानों को केवल प्रमाणित विक्रेताओं और अधिकृत केंद्रों से ही बीज खरीदने की सलाह देते रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति स्पष्ट कर किसानों के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त की जानी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन या कृषि विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो भी आधिकारिक जांच से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।