वन क्षेत्र बढ़ाने के दावों पर कांग्रेस का सवाल, जंगलों की कटाई और खनन को लेकर सरकार पर निशाना

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार के वन क्षेत्र बढ़ने के दावों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पिछले दो वर्षों में खनन परियोजनाओं के लिए हजारों हेक्टेयर जंगलों की कटाई हुई है। कांग्रेस ने हसदेव अरण्य, रामगढ़ और अन्य वन क्षेत्रों में पर्यावरण तथा सांस्कृतिक विरासत पर खतरा बढ़ने का दावा करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

Jul 3, 2026 - 16:16
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वन क्षेत्र बढ़ाने के दावों पर कांग्रेस का सवाल, जंगलों की कटाई और खनन को लेकर सरकार पर निशाना

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार द्वारा वन क्षेत्र में वृद्धि के दावों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में खनन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की गई है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकार के दावों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है तथा पिछले दो वर्षों में हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

कांग्रेस के अनुसार वर्ष 2023-24 में लगभग 1069.26 हेक्टेयर तथा वर्ष 2024-25 में 1072.32 हेक्टेयर वन क्षेत्र खनन परियोजनाओं के लिए काटा गया। पार्टी का दावा है कि दो वर्षों में कुल 2140.58 हेक्टेयर, यानी पांच हजार एक सौ सैंतीस एकड़ से अधिक जंगल प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हसदेव अरण्य, धरमजयगढ़, सरगुजा, कोरबा, सूरजपुर, मैनपाट, बैलाडीला और कांकेर सहित कई क्षेत्रों में विभिन्न खनन परियोजनाओं के लिए वन भूमि का उपयोग किया जा रहा है।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर ग्राम सभाओं के अधिकारों की अनदेखी करते हुए खनन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। कांग्रेस का कहना है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में भी अतिक्रमण और वन कटाई से जैव विविधता तथा स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

सुरेंद्र वर्मा ने रामगढ़ क्षेत्र का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के दावे करती है, लेकिन दूसरी ओर खनन गतिविधियों के कारण इन क्षेत्रों पर खतरा बढ़ रहा है। कांग्रेस ने दावा किया कि प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई और अन्य ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022 में परसा कोल सहित पांच कोल ब्लॉकों के आवंटन को निरस्त करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था।

कांग्रेस ने हसदेव अरण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र मध्य भारत के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है और हाथियों सहित अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। पार्टी का आरोप है कि यहां नई खनन परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई जारी है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और आदिवासी समुदायों के जीवन पर असर पड़ रहा है।

प्रेस विज्ञप्ति में सरकार के प्रतिपूरक वनीकरण के दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार पौधारोपण के जरिए वन क्षेत्र बढ़ने का दावा कर रही है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। पार्टी ने आरोप लगाया कि संसाधनों के असंतुलित दोहन, खनन गतिविधियों और जंगलों की कटाई के कारण पर्यावरणीय नुकसान हो रहा है तथा हजारों आदिवासी परिवारों और वन्यजीवों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। कांग्रेस ने सरकार से वन संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।