स्कूलों में मंत्रों की अनिवार्यता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की वकालत
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्कूलों में कुछ मंत्रों के अनिवार्य पाठ को लेकर आपत्ति जताई है। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष बनाए रखते हुए सभी वर्गों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए कुछ मंत्रों के अनिवार्य पाठ से जुड़े निर्णय पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सभी वर्गों और समुदायों के लिए समान रूप से स्वीकार्य बनाए रखना आवश्यक है तथा किसी भी प्रकार की अनिवार्यता को लागू करते समय विविध सामाजिक और धार्मिक पृष्ठभूमियों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्यगीत जैसे राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान सभी को करना चाहिए, लेकिन अन्य धार्मिक या आध्यात्मिक मंत्रों को अनिवार्य बनाए जाने पर विचार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विभिन्न धर्मों, समुदायों और सामाजिक वर्गों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं, इसलिए शिक्षा व्यवस्था को समावेशी बनाए रखना जरूरी है।
कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी विशेष वैचारिक एजेंडे को बढ़ावा देने का प्रयास नहीं होना चाहिए। पार्टी का मानना है कि सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी व्यवस्थाएं अपनाई जानी चाहिए जो सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से सहज और स्वीकार्य हों। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित है और शिक्षा प्रणाली में भी इसी भावना को बनाए रखा जाना चाहिए।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से देश की शिक्षा प्रणाली में विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और सामाजिक परंपराओं के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी दी जाती है, लेकिन किसी विशेष धार्मिक अभ्यास को अनिवार्य बनाना अलग विषय है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में किसी एक परंपरा से जुड़े मंत्रों का अनिवार्य वाचन किया जाता है, तो अन्य समुदायों द्वारा भी अपनी धार्मिक परंपराओं को शामिल करने की मांग उठ सकती है। ऐसे में शिक्षा संस्थानों में संतुलन बनाए रखना और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक होगा।
पार्टी का कहना है कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान, वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना होना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि विद्यार्थियों को संस्कार और सदाचार की शिक्षा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।
कांग्रेस ने सरकार से शिक्षा संबंधी निर्णयों पर व्यापक संवाद और विचार-विमर्श करने की अपील की है। पार्टी का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, वैज्ञानिक और समावेशी बनाए रखने की आवश्यकता है ताकि सभी वर्गों के विद्यार्थी समान अवसर और सम्मान के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें।
हालांकि, इस विषय पर राज्य सरकार या स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर आगे की स्थिति सरकार के स्पष्टीकरण और संभावित निर्णयों के बाद स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल कांग्रेस ने इस विषय को सार्वजनिक बहस और चर्चा का मुद्दा बनाया है।