मानसून से पहले अतिशेष धान के निराकरण में विफल सरकार, 15 लाख मीट्रिक टन धान खराब होने का खतरा: कांग्रेस

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर अतिशेष धान के निराकरण में लापरवाही का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि मानसून से पहले धान का उठाव नहीं होने से 15 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खराब होने की आशंका है, जिससे किसानों और सहकारी समितियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

Jun 10, 2026 - 16:05
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मानसून से पहले अतिशेष धान के निराकरण में विफल सरकार, 15 लाख मीट्रिक टन धान खराब होने का खतरा: कांग्रेस

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अतिशेष धान के निराकरण में विफल रहने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि मानसून की शुरुआत से पहले सरकार धान का उठाव और भंडारण सुनिश्चित नहीं कर पाई है, जिसके कारण बड़ी मात्रा में धान खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि धान खरीदी समाप्त हुए लगभग चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार अब तक अतिरिक्त धान के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था नहीं कर पाई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 15 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खुले में पड़ा हुआ है, जो मानसूनी बारिश के दौरान भीगकर खराब हो सकता है।

कांग्रेस के अनुसार, बस्तर संभाग में ही लगभग 4.65 लाख मीट्रिक टन धान खुले में रखा हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत 141 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने अब तक इस धान के सुरक्षित भंडारण या त्वरित उठाव के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।

वंदना राजपूत ने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान भीषण गर्मी और बेमौसम बारिश दोनों का सामना कर रहा है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो बड़ी मात्रा में धान खराब हो जाएगा और इससे सरकारी खजाने को भी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि बाद में खराब धान को आधार बनाकर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि राज्य में डबल इंजन सरकार है तो केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ से खरीदे गए धान से बने चावल को केंद्रीय पूल में शामिल करने की दिशा में पहल करनी चाहिए थी। पार्टी का आरोप है कि केंद्र द्वारा पूरा चावल नहीं खरीदे जाने के कारण राज्य सरकार के सामने अतिरिक्त धान के निस्तारण की समस्या खड़ी हुई है।

कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने अतिरिक्त धान को खुले बाजार में बेचने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। पार्टी के अनुसार, खरीदे गए धान की लागत परिवहन और अन्य खर्चों को मिलाकर काफी अधिक है, जबकि नीलामी के लिए अपेक्षाकृत कम आधार मूल्य तय किया गया, जिससे पर्याप्त खरीदार नहीं मिले।

वंदना राजपूत ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश को कोयला, लौह अयस्क, टीन और बॉक्साइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज उपलब्ध कराता है, लेकिन किसानों द्वारा उत्पादित धान से बने चावल के लिए केंद्रीय पूल में पर्याप्त स्थान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने इसे किसानों की उपेक्षा बताते हुए कहा कि इसका असर सहकारी समितियों और किसानों दोनों पर पड़ रहा है।

कांग्रेस ने मांग की है कि राज्य सरकार मानसून के दौरान धान को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए, संग्रहण केंद्रों में पड़े धान का शीघ्र उठाव सुनिश्चित करे तथा केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर किसानों के हितों की रक्षा करे। पार्टी का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इसका आर्थिक नुकसान प्रदेश के किसानों और सहकारी संस्थाओं को भुगतना पड़ेगा।