रायपुर के जगन्नाथ मंदिर में हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश की खुशहाली की कामना
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में शामिल हुए। उन्होंने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ के लोगों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन भारतीय संस्कृति की एकता, भाईचारे और आध्यात्मिकता को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में सहभागिता की। यह आयोजन धार्मिक आस्था और भक्ति भाव से परिपूर्ण रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ निरंतर विकास की ओर अग्रसर हो और हर नागरिक का जीवन सुखमय बने, यही उनकी प्रार्थना है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरिनाम संकीर्तन की परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने, आपसी भाईचारा बढ़ाने और सद्भाव का संदेश देने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में भक्ति, सेवा और समर्पण का विशेष महत्व है, जो समाज को एक सूत्र में बांधता है।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति संगीत और संकीर्तन की गूंज से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पूरे माहौल को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। आयोजन में उपस्थित लोगों ने इसे एक आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर अनुभव बताया।
इस धार्मिक आयोजन में विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस पावन अवसर पर भक्ति और संस्कृति का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे आयोजन न केवल हमारी परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।
उन्होंने मंदिर परिसर में उपस्थित लोगों से भी संवाद किया और सभी को धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार संस्कृति और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयासरत रहेगी।
कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा।