पोड़ी क्षेत्र की बंद खदानों में अवैध कोयला उत्खनन का काला खेल, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

एमसीबी जिले के पोड़ी क्षेत्र में बंद पड़ी खदानों में अवैध कोयला उत्खनन का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि माफिया खुलेआम सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर मजदूरों से खनन करवा रहे हैं और रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों के जरिए कोयले की तस्करी कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन, वन विभाग और पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

May 10, 2026 - 13:34
May 10, 2026 - 13:35
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पोड़ी क्षेत्र की बंद खदानों में अवैध कोयला उत्खनन का काला खेल, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के पोड़ी क्षेत्र में अवैध कोयला उत्खनन का बड़ा मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। क्षेत्र की बंद पड़ी खदानों में कोयला माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन कर रहे हैं। यह पूरा मामला वन परिक्षेत्र बैकुंठपुर के अंतर्गत आने वाली पोड़ी नंबर 7 और 12 की बंद खदानों से जुड़ा हुआ है, जहां बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मजदूरों से कोयला निकाला जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदानों के अंदर बड़े-बड़े गड्ढे और मुहाने बनाकर खनन कार्य किया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मजदूरों की जान जोखिम में डालकर यह अवैध काम लगातार जारी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि खनिज विभाग, वन विभाग और पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की गश्त केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और माफिया बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रैक्टरों के जरिए कोयले की तस्करी की जा रही है। यह अवैध कोयला रेत या अन्य सामग्री की आड़ में बाहर ले जाया जाता है, जिससे प्रशासन को भी लंबे समय तक भनक नहीं लग पाती। इस पूरे खेल से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

इसके अलावा अवैध खनन से क्षेत्र के पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। जंगलों और जमीन को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे आने वाले समय में पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इससे पहले घुटरा क्षेत्र में हुई घटनाओं से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। अब लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है। क्या इस पूरे नेटवर्क को किसी प्रभावशाली संरक्षण का समर्थन प्राप्त है?

स्थानीय लोगों ने अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इन बंद खदानों को तुरंत सील किया जाए और अवैध खनन में शामिल सभी लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

फिलहाल यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है और सभी की नजर इस बात पर है कि आगे इस अवैध खनन पर क्या कार्रवाई होती है।