चिरमिरी नगर निगम में करोड़ों का डस्टबीन घोटाला, फोटो खिंचवाकर किया गया फर्जी भुगतान

चिरमिरी नगर निगम में स्वच्छता अभियान के तहत खरीदे गए डस्टबीन को लेकर करोड़ों रुपये के फर्जी भुगतान का आरोप सामने आया है। आरोप है कि कुछ डस्टबीन केवल दिखावे के लिए लगाए गए और उनकी तस्वीरें खींचकर बड़े पैमाने पर फर्जी आहरण किया गया।

Oct 28, 2025 - 12:06
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चिरमिरी नगर निगम में करोड़ों का डस्टबीन घोटाला, फोटो खिंचवाकर किया गया फर्जी भुगतान

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, चिरमिरी। नगर निगम चिरमिरी में स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये के डस्टबीन घोटाले का आरोप लगा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, निगम द्वारा खरीदे गए डस्टबीन की संख्या और लागत में भारी अंतर पाया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की आशंका गहराई है।

 

जानकारी के मुताबिक, निगम ने शहर के सभी वार्डों में स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए लाखों रुपये मूल्य के स्टील डस्टबीन खरीदने का दावा किया था। लेकिन जमीनी स्तर पर जांच करने पर यह पाया गया कि अधिकांश वार्डों में डस्टबीन या तो लगाए ही नहीं गए या फिर नाममात्र के लिए कुछ बिन्स रखकर फोटो खिंचवा लिए गए।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यही तस्वीरें बाद में फर्जी दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का आहरण किया गया। आरोप है कि इस पूरे घोटाले में नगर निगम के कुछ अधिकारी, ठेकेदार और सप्लायर दुकानदार शामिल हैं, जिन्होंने मिलीभगत से जनता के पैसे को लूटा।

इस मामले में हल्दीबाड़ी स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर दो स्टील के डस्टबीनों की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं। आरोप लगाने वालों के अनुसार, ये बिन्स उसी दिखावटी आपूर्ति का हिस्सा हैं, जिनके आधार पर भारी भुगतान किया गया है। प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो शहर के अन्य इलाकों में डस्टबीन कहां हैं?

स्वच्छता अभियान की साख पर यह मामला गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। केंद्र और राज्य सरकारें स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता में पारदर्शिता और जनभागीदारी पर जोर दे रही हैं, लेकिन ऐसे भ्रष्टाचार के आरोप उस अभियान की मूल भावना को कमजोर करते हैं।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक संगठन अब उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर रोक लग सके।

फिलहाल, नगर निगम की ओर से इस गंभीर आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि "स्वच्छता के नाम पर" एक बार फिर सरकारी धन की सफाई कर दी गई।