चिरायु योजना बनी जीवनदायिनी, हैदराबाद में सफल ओपन हार्ट सर्जरी से छह वर्षीय बच्चे को मिला नया जीवन

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित चिरायु योजना ने बिलासपुर के छह वर्षीय टोकेशवर निर्मलकर को नया जीवन दिया। गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चे की हैदराबाद में जटिल ओपन हार्ट सर्जरी कराई गई, जिसका पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया।

Jun 4, 2026 - 11:17
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चिरायु योजना बनी जीवनदायिनी, हैदराबाद में सफल ओपन हार्ट सर्जरी से छह वर्षीय बच्चे को मिला नया जीवन

UNITED NEWS OF ASIA. विशु तिवारी, बिलासपुर l राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित चिरायु योजना एक बार फिर जरूरतमंद परिवार के लिए वरदान साबित हुई है। इस योजना की बदौलत बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड के एक छह वर्षीय बच्चे को गंभीर हृदय रोग से मुक्ति मिली और उसे नया जीवन प्राप्त हुआ। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले टोकेशवर निर्मलकर की हैदराबाद में सफल ओपन हार्ट सर्जरी कराई गई, जिसका पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों, हृदय रोग, कुपोषण, विकास संबंधी समस्याओं और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार सुनिश्चित करना है। इसके लिए चिरायु दल स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्क्रीनिंग अभियान चलाता है।

इसी अभियान के दौरान तखतपुर विकासखंड के उसलापुर निवासी रामायण निर्मलकर के पुत्र टोकेशवर निर्मलकर की जांच की गई। प्रारंभिक परीक्षण में बच्चे के हृदय में गंभीर जन्मजात विकार पाए गए। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और समय पर उपचार नहीं मिलने पर उसके जीवन को खतरा हो सकता था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिरायु दल ने तत्काल बच्चे को जिला अस्पताल बिलासपुर रेफर किया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद उसे रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) भेजा गया। विस्तृत परीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि बच्चे की बीमारी अत्यंत जटिल है और उसका उपचार राज्य के बाहर किसी सुपर स्पेशियलिटी कार्डियक सेंटर में ही संभव है।

इसके बाद बच्चे को हैदराबाद स्थित केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि बच्चे को बचाने के लिए जटिल और जोखिमपूर्ण ओपन हार्ट सर्जरी आवश्यक है। इस सर्जरी पर लगभग सात लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान था, जिसे वहन करना परिवार के लिए संभव नहीं था।

स्वास्थ्य विभाग और चिरायु योजना से जुड़े अधिकारियों ने मामले को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक दस्तावेज और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कराई। लगातार प्रयासों के बाद राज्य नोडल एजेंसी द्वारा उपचार के लिए सात लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। यह राशि सीधे अस्पताल को हस्तांतरित की गई, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

8 मई 2026 को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चली जटिल ओपन हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। ऑपरेशन के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और 29 मई 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है।

उपचार के बाद भी चिरायु दल द्वारा बच्चे की नियमित निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य टीम समय-समय पर उसके घर पहुंचकर फॉलोअप जांच कर रही है। इस सफलता पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग और चिरायु दल की सराहना करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। वहीं बच्चे के परिजनों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उनके बेटे को नया जीवन दिया है।