छत्तीसगढ़ में शिक्षा का स्तर गिरा, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के स्तर में गिरावट को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने शिक्षकों की कमी, आरटीई सीटों में कटौती और बुनियादी सुविधाओं की कमी को प्रमुख कारण बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी की प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है और इसके लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।
वंदना राजपूत ने कहा कि एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (UDISE) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ देश में शिक्षा के मामले में नीचे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया है, जो राज्य के लिए चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने बताया कि भाषा विषय में प्रदर्शन -3 और विज्ञान में -5 स्तर तक गिर गया है, जो शिक्षा की गुणवत्ता में आई गिरावट को दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नियमित शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगा दी है, जिसके कारण अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसके साथ ही कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जैसे शौचालय की कमी, जिससे छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि शिक्षकों से पढ़ाने के बजाय अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी शिक्षकों से कुत्तों और मवेशियों की गणना करवाई जाती है, तो कभी उन्हें विभिन्न सर्वे और ड्यूटी में लगाया जाता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
उन्होंने सरकार पर शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत मिलने वाले अवसरों को सीमित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी-1 और कक्षा 1 में प्रवेश मिलता था, लेकिन अब इसे सीमित कर केवल कक्षा 1 तक कर दिया गया है।
वंदना राजपूत ने कहा कि आरटीई के तहत पहले करीब 80 हजार सीटों पर गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिलता था, जिसे इस वर्ष घटाकर मात्र 19,489 कर दिया गया है। यह लगभग 80 प्रतिशत की कटौती है, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर सीधा असर पड़ा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले हजारों स्कूल बंद किए गए और नए सेटअप के नाम पर शिक्षकों के पदों में कटौती की गई। इससे शिक्षा व्यवस्था और कमजोर हुई है।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, नियमित शिक्षक भर्ती की जाए और स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर भविष्य की पीढ़ी पर पड़ेगा।