घटना दंतेवाड़ा जिला अंतर्गत स्थित बैलाडीला की पहाड़ियां क्षेत्र की है, जहां एक आदिवासी महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। दुर्गम पहाड़ी इलाका, कच्चे रास्ते और आवागमन के सीमित साधनों के कारण महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
ऐसे में ग्रामीणों ने पास में तैनात केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के जवानों से मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही जवानों ने बिना किसी देरी के मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तत्काल राहत कार्य शुरू किया।
सीआरपीएफ़ की 165वीं बटालियन के अधिकारी राजेश गुर्जर के नेतृत्व में जवान महिला तक पहुंचे और उपलब्ध संसाधनों के सहारे उसे खाट पर लिटाया। इसके बाद जवानों ने स्वयं अपने कंधों पर खाट उठाकर कई किलोमीटर तक पैदल चलकर महिला को सुरक्षित सड़क मार्ग तक पहुंचाया, जहां से उसे आगे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
दुर्गम पहाड़ी रास्ते, जंगलों से होकर गुजरते संकरे पगडंडियों और जोखिम भरे हालात के बावजूद जवानों ने न तो थकान की परवाह की और न ही कठिन परिस्थितियों की। उनका एकमात्र उद्देश्य महिला को समय रहते चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना था।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यदि सीआरपीएफ जवान समय पर सहायता के लिए आगे नहीं आते, तो महिला और गर्भस्थ शिशु की जान पर खतरा बन सकता था। जवानों की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका, जिससे उसकी स्थिति अब सुरक्षित बताई जा रही है।
इस पूरे अभियान का नेतृत्व सीआरपीएफ़ की 165वीं बटालियन के अधिकारी राजेश गुर्जर ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का कर्तव्य केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय आम नागरिकों की सहायता करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने जवानों की टीम भावना और साहस की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के मानवीय प्रयास समाज में सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास को और मजबूत करते हैं।
गौरतलब है कि बैलाडीला का इलाका दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। यहां आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं दूर स्थित हैं और आपात स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना कठिन हो जाता है। ऐसे क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबल कई बार ग्रामीणों के लिए जीवन रक्षक साबित होते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वर्दी में तैनात जवान केवल सुरक्षा के प्रहरी ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय आम जनता के सच्चे रक्षक भी होते हैं। सीआरपीएफ़ के इस मानवीय कार्य की स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों द्वारा सराहना की जा रही है।