प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ एवं ज्योतिषाचार्य पंडित सुधांशु तिवारी के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से हो रही है और यह तिथि 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार 2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है, जो शास्त्रीय दृष्टि से होलिका दहन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हालांकि 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा काल भी लग रहा है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा के मुख काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है। इसी कारण ज्योतिषाचार्य सुधांशु तिवारी के मुताबिक, भद्रा के पूंछ काल में यानी रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 02 मिनट तक होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत और सुरक्षित माना गया है। उनके अनुसार प्रदोष काल में होलिका दहन का विशेष महत्व होता है, लेकिन इस बार भद्रा की वजह से रात का पूंछ काल ही श्रेष्ठ विकल्प माना जा रहा है।
वहीं, इस विषय पर अन्य ज्योतिषाचार्यों के भी अलग-अलग मत सामने आए हैं। अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी के अनुसार 2 मार्च की शाम को प्रदोष काल में पूर्णिमा तो मिलेगी, लेकिन उस समय भद्रा लगी होने के कारण होलिका दहन करना उचित नहीं माना जाना चाहिए। वहीं 3 मार्च को भद्रा नहीं है, लेकिन उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा उपलब्ध नहीं हो पाएगी, क्योंकि पूर्णिमा तिथि शाम से पहले ही समाप्त हो रही होगी। ऐसे में शास्त्रीय नियमों के आधार पर कुछ विद्वान 3 मार्च को भद्रा रहित समय में होलिका दहन को भी मान्य मानते हैं।
लेकिन 3 मार्च को एक और महत्वपूर्ण कारण सामने आता है। इस दिन वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और इसका सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा। यह ग्रहण न केवल भारत में, बल्कि पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगा। ग्रहण और सूतक काल के कारण 3 मार्च को होलिका दहन और रंगों की होली दोनों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
इन्हीं सभी परिस्थितियों को देखते हुए पंडित सुधांशु तिवारी का स्पष्ट मत है कि होलिका दहन 2 मार्च 2026 की रात भद्रा पूंछ काल में करना ही सबसे उचित और शास्त्रसम्मत रहेगा। वहीं, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल होने के कारण रंगभरी होली नहीं खेली जाएगी। इस कारण इस वर्ष धुलंडी यानी रंगों की होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
होलिका दहन की परंपरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, मानसिक तनाव कम होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया होलिका दहन आने वाले वर्ष के लिए शुभ फल प्रदान करता है।